खैरागढ़ (दावा)। वन मंडल ने मादा तेंदुए की मौत का मामला अब पूरी तरह से सुलझा लिया है। वन विभाग ने महज 24 घंटे के भीतर घटना से जुड़ी हर कड़ी जोड़ते हुए पूरे गिरोह को बेनकाब किया है। इस पूरे मामले की सबसे बड़ी बात यह है कि, जो जांच में सामने आया है कि, कुछ लोगों ने जंगल में बिजली के तार लगाकर जानवर पकडऩे का जाल बिछा रखा था।
यह जाल किसी और वन्य प्राणी के शिकार के लिए लगाया गया था, लेकिन उसमें एक मादा तेंदुआ फंस गई।
करेंट लगने से तेंदुआ बुरी तरह घायल हो गया
इसके बाद जो हुआ, वह बेहद डराने वाला है। आरोपियों ने तेंदुए को मरता छोडऩे के बजाय उस पर लाठी-डंडों से लगातार वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद वे पैर के चारों पंजे और मुंह से चार दांत काटकर ले गए और शव को वहीं छोडक़र फरार हो गए।
तेंदुए की हत्या के पीछे अंधविश्वास बड़ा कारण
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है कि, आरोपियों में से एक व्यक्ति जादू-टोना करता है। इसी वजह से आशंका जताई जा रही है कि, तेंदुए की हत्या के पीछे अंधविश्वास भी एक बड़ा कारण हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी कुछ लोग वन्य प्राणियों के अंगों को तंत्र-मंत्र से जोडक़र देखते हैं।वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर स्थानीय अमला, राज्य स्तरीय उडऩदस्ता दल और डॉग स्क्वॉयड की टीम मौके पर पहुंची। पूछताछ और जांच के बाद पूरे गिरोह की पहचान कर ली गई।पकड़े गए आरोपी डोमन लाल वर्मा, चंदूराम वर्मा, हेमचंद वर्मा, दीपक यादव, फिऱोज़ निषाद, कचरू यादव, भगवती वर्मा। आरोपियों की निशानदेही पर बिजली के तार, लाठी-डंडे, धारदार हथियार और तेंदुए के गायब पंजे व दांत भी बरामद कर लिए गए। सभी जरूरी सैंपल सुरक्षित रखे गए हैं। मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। मामला दिखाता है कि जंगलों में लगाए जा रहे अवैध करंट जाल और अंधविश्वास किस तरह वन्य जीवों के लिए जानलेवा बन रहे हैं। साथ ही यह भी साफ होता है कि, समय पर और सख्त कार्रवाई हो तो ऐसे अपराधियों तक जल्दी पहुंचा जा सकता है।



