Home छत्तीसगढ़ पुलिसिया घेराबंदी और भ्रम के बीच हनईबन महापंचायत सम्पन्न…

पुलिसिया घेराबंदी और भ्रम के बीच हनईबन महापंचायत सम्पन्न…

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खैरागढ़। दनिया–अतरिया–उदयपुर–हनईबन परिक्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन और सीमेंट फैक्टरी परियोजना के विरोध में शनिवार को हनईबन में आयोजित किसान महापंचायत भारी बाधाओं के बावजूद सफलतापूर्वक संपन्न हुई। किसान अधिकार संघर्ष समिति ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि प्रक्रिया पहले ही निरस्त हो चुकी होने के बावजूद महापंचायत को कमजोर करने के उद्देश्य से पुलिसिया घेराबंदी और भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया।

किसानों के अनुसार हनईबन पहुंचने वाले प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए गए। मजगांव, कालेगोंदी, जगमड़वा सहित कई गांवों में कोतवालों के माध्यम से मुनादी कराई गई कि महापंचायत स्थगित हो चुकी है, जिससे ग्रामीणों में भ्रम और भय का माहौल बना।

अनुमति के बावजूद भारी पुलिस तैनाती
किसानों ने बताया कि महापंचायत शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित होनी थी और इसके लिए प्रशासन से अनुमति भी ली गई थी। इसके बावजूद भारी पुलिस बल तैनात कर किसानों को रोका गया। गोकना–बागुर, भुरभूसी, गंडई चौक और रैमडवा क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी गई। इसका असर यह हुआ कि जहां हजारों किसानों के पहुंचने की संभावना थी, वहां करीब 1000 से 1500 किसान ही सभा स्थल तक पहुंच सके। कई किसान और महिलाएं 3 से 4 किलोमीटर पैदल चलकर महापंचायत स्थल पहुंचे और आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

निरस्त फैसलों का श्रेय लेने पर आपत्ति
महापंचायत में किसानों ने कुछ नेताओं पर पहले से निरस्त संडी जनसुनवाई और हनईबन ब्लॉक नीलामी का श्रेय लेने का आरोप लगाया। किसानों का कहना था कि ये निर्णय 6 दिसंबर को हुई ट्रैक्टर रैली और लगातार दबाव का परिणाम हैं। इसे आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश बताया गया।

करीब 3 बजे एसडीएम मौके पर पहुंचे, जहां किसानों ने ज्ञापन सौंपकर लिखित जवाब की मांग की। एसडीएम ने 15 मिनट के भीतर लिखित उत्तर देते हुए बताया कि 6 दिसंबर को सौंपे गए ज्ञापन के आधार पर शासन द्वारा 9 दिसंबर को संडी जनसुनवाई स्थगित और हनईबन ब्लॉक नीलामी निरस्त करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही पूरी परियोजना को निरस्त करने की मांग राज्य शासन को भेजी जा रही है।

महापंचायत के तीन बड़े निर्णय
महापंचायत में तीन अहम फैसले लिए गए—
परियोजना पूरी तरह निरस्त होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
24 जनवरी को विचारपुर भाटा में अगली महापंचायत आयोजित की जाएगी।
किसान अधिकार संघर्ष समिति का विस्तार करते हुए नए गांवों के प्रतिनिधियों और सरपंचों को कार्यकारिणी में शामिल किया गया। मन्नू चंदेल और संजू चंदेल को उपाध्यक्ष तथा रमेश साहू को सह-सचिव बनाया गया।

इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया कि वे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि वे परियोजना के पक्ष में हैं या विरोध में। किसानों ने दो टूक कहा कि अब भ्रम, दबाव और आधे-अधूरे फैसले स्वीकार नहीं किए जाएंगे और आंदोलन निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।

किसान अधिकार संघर्ष समिति की अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल ने कहा कि हनईबन नीलामी और संडी जनसुनवाई का निरस्त होना संगठित किसानों की ऐतिहासिक जीत है। यह सिर्फ एक निर्णय नहीं, बल्कि जमीन, पानी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा की शुरुआत है। दनिया–अतरिया–उदयपुर–हनईबन परिक्षेत्र की पूरी परियोजना स्थायी रूप से रद्द होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
संरक्षक गिरवर जंघेल और संयोजक सुधीर गोलछा ने कहा कि यह लड़ाई किसी संगठन की नहीं, पूरे अंचल के अस्तित्व की है। आधे-अधूरे फैसले स्वीकार नहीं, खनन और सीमेंट फैक्टरी परियोजना हमेशा के लिए बंद होनी चाहिए।

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