10 माह के शिशु को मिला नया जीवन
राजनांदगांव। गांधी नर्सिंग होम में हाल ही में एक अत्यंत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण बीमारी का सफलतापूर्वक निदान किया गया है, जिसने एक नन्हे शिशु को जीवन की नई आशा दी है। यह मामला 10 माह के एक शिशु का है, जिसका वजन मात्र 3.5 किलोग्राम है जो उसके जन्म के समय भी था। सामान्यत: इस उम्र तक बच्चे का वजन 7-8 किलो होना चाहिए। लंबे समय से बच्चा बार-बार बीमार पड़ रहा था, वजन नहीं बढ़ रहा था और उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिससे परिजनों को उसके जीवन को लेकर गहरी चिंता थी। आमतौर पर विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि डेढ़ से दो वर्ष की आयु तक बच्चों को अतिरिक्त नमक और चीनी नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
लेकिन इस मामले में स्थिति बिल्कुल उलट थी
जांच के दौरान पता चला कि शिशु बार्टर सिंड्रोम टाइप 3 नामक एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीडि़त है। यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि पूरे भारत में मात्र 1500 ऐसे केस होंगे। इस रोग में शरीर के जरिए नमक (सोडियम और पोटैशियम) अत्यधिक मात्रा में बाहर निकल जाता है, जिससे बच्चे की वृद्धि, विकास और जीवन स्वयं खतरे में पड़ जाता है।
इस बीमारी की खास बात यह है कि जहाँ सामान्य बच्चों में नमक सीमित किया जाता है, वहीं बार्टर सिंड्रोम में बच्चे को जान बचाने के लिए अधिक मात्रा में नमक देना अनिवार्य होता है। समय रहते की गई सटीक जांच और जेनेटिक पुष्टि के बाद बच्चे के इलाज की दिशा पूरी तरह बदली गई। उच्च नमक युक्त आहार और उचित चिकित्सकीय देखरेख शुरू होते ही बच्चे की स्थिति में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। यह मामला न केवल चिकित्सा जगत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि हर कमजोर, कम वजन या बार-बार बीमार होने वाला बच्चा सामान्य कुपोषण का ही शिकार हो यह जरूरी नहीं। कई बार इसके पीछे कोई दुर्लभ लेकिन इलाज योग्य बीमारी भी हो सकती है। यह प्रयास एक बार फिर साबित करता है कि समय पर सही निदान, आधुनिक जांच सुविधाएँ और समर्पित चिकित्सा टीम मिलकर असंभव लगने वाले मामलों में भी आशा की किरण जगा सकते हैं। यह नन्हा बच्चा, जिसने कभी जीवन की उम्मीद लगभग खो दी थी, आज एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है।


