7 गांवों के हजारों ग्रामीणों ने घेरी सडक़, पीडब्ल्यूडी के एसडीओ के लिखित आश्वासन के बाद शांत हुआ आंदोलन
डोंगरगांव। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सालों की अनदेखी से त्रस्त डोंगरगांव विकासखंड के ग्रामीणों का धैर्य बुधवार को जवाब दे गया। ग्राम आसरा सहित आसपास के 7 गांवों के हजारों ग्रामीणों ने बुधवार सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक डोंगरगांव-छुरिया मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जर्जर सडक़ के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन टेंडर होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा रहा है। आक्रोशित ग्रामीणों में ग्राम आसरा, आडाम, दर्रा बांध, सांगिन कछार, बम्हनी भांठा, खम्हेरा और तिलाई रवार के महिला-पुरुष और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। ग्रामीणों ने बताया कि आसरा, कोकपुर, बम्हनीभाठा और तेंदुनाला जैसे पहुंच मार्ग इतने जर्जर हो चुके हैं कि पैदल चलना भी दूभर है। बारिश के दिनों में इन गड्ढों में पानी भर जाने से कई लोग जानलेवा दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। आंदोलन के दौरान एक बात चर्चा का विषय रही कि चक्काजाम में स्थानीय ग्राम पंचायतों के सरपंच तो ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे, लेकिन जनपद और जिला स्तर का कोई भी बड़ा जनप्रतिनिधि ग्रामीणों का दर्द सुनने नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में और अधिक रोष देखा गया। चक्काजाम की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर कौशल जत्ती मौके पर पहुंचे, लेकिन ग्रामीण उच्चाधिकारियों को बुलाने की मांग पर अड़े रहे। कुछ देर बाद विभाग के एसडीओ ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। एसडीओ ने ग्रामीणों को लिखित में आश्वासन दिया कि सडक़ की तत्काल मरम्मत शुरू की जाएगी और जून 2026 तक डामरीकरण व चौड़ीकरण का कार्य हर हाल में प्रारंभ कर दिया जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि तेंदुनाला से कोकपुर, आसरा से जंतर, तिलईरवार से अड़ाम और आसरा से जरहामहका तक डामरीकरण के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है, फिर भी विभाग उदासीन बना हुआ है।
प्रशासन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दिए गए लिखित आश्वासन के अनुसार समय-सीमा में कार्य शुरू नहीं हुआ, तो आगामी दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा। कलेक्टर जितेन्द्र यादव को भी पूर्व में इस संबंध में ज्ञापन सौंपा जा चुका है। एसडीओ के आश्वासन के बाद दोपहर 1 बजे चक्काजाम समाप्त हुआ और आवागमन बहाल हो सका।



