एसडीएम की सख्त चेतावनी : 10 अप्रैल तक काम शुरू करें या राशि लौटाएं, वरना नीलाम होगी संपत्ति
राजनांदगांव। प्रधानमंत्री आवास योजना (1.0) के तहत किश्त की राशि डकारने के बाद भी घर का निर्माण अधूरा छोडऩे वाले हितग्राहियों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शहर के विभिन्न वार्डों के ऐसे 145 हितग्राही, जिन्होंने पिछले चार वर्षों से निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ाया है, उनसे अब सरकारी राशि की वसूली की जाएगी। कलेक्टर जितेन्द्र यादव के निर्देश पर निगम और तहसील प्रशासन ने इस दिशा में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मंगलवार 24 मार्च को अनुविभागीय अधिकारी गौतम चंद पाटिल के कार्यालय में 17 लापरवाह हितग्राहियों की विशेष पेशी हुई। पेशी के दौरान एसडीएम ने सख्त लहजे में कहा कि यदि आवास निर्माण में गति नहीं लाई गई या राशि निगम कोष में जमा नहीं की गई, तो संपत्ति की नीलामी जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासकीय धन का व्यक्तिगत कार्यों में उपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निजी कार्यों में खर्च कर दी सरकारी राशि
जांच में यह बात सामने आई है कि कई हितग्राहियों ने प्रथम किश्त की राशि प्राप्त करने के बाद उसे घर बनाने के बजाय अपने निजी कार्यों में खर्च कर दिया। प्रशासन ने इसे शासकीय राशि का दुरुपयोग मानते हुए 10 अप्रैल तक की अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) तय की है। यदि इस तिथि तक निर्माण कार्य का स्तर आगे नहीं बढ़ता है, तो संबंधितों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने जानकारी दी कि राजनांदगांव में बीएलसी घटक के तहत 7956 आवास स्वीकृत हुए थे। जिनमें से 7778 पूर्ण हो चुके हैं। केवल 178 आवास निर्माणाधीन हैं। जिनमें से 145 हितग्राही पिछले 3-4 वर्षों से काम रोककर बैठे हैं। बार-बार नोटिस और समझाइश के बाद भी गंभीरता न दिखाने के कारण अब एसडीएम के माध्यम से सख्त कदम उठाए गए हैं।
प्रशासन का संदेश : लोक कल्याण के लिए है राशि
आयुक्त ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य हर गरीब को पक्की छत देना है, न कि व्यक्तिगत उपयोग के लिए धन बांटना। शासकीय राशि का गलत उपयोग करने वालों के खिलाफ प्रशासन अब पीछे नहीं हटेगा। सभी 145 चिन्हित हितग्राहियों को अंतिम अवसर दिया गया है।



