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किसानों के साथ छल : खैरागढ़ सेवा सहकारी समिति डोकराभाठा में बड़ा खाद घोटाला…

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किसानों के नाम पर बिना अनुमति निकाला गया लाखों का कर्ज, किसानों ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

फर्जी तरीके से खाद और केसीसी लोन दर्ज
जिला किसान कांग्रेस ने पीडि़त किसानों से मिलकर सुनी समस्या, पहुंचे कलेक्ट्रेट कार्यालय

खैरागढ़ (दावा)। फर्जी तरीके से खाद और केसीसी ऋण लोन दर्ज कर दिया। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में सेवा सहकारी समिति डोकराभाठा के अंतर्गत आने वाले सैकड़ों किसानों के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला प्रकाश में आया है।। किसानों का आरोप है,कि समिति के जिम्मेदारों ने मिलीभगत कर उनके नाम पर फर्जी तरीके से खाद और केसीसी लोन दर्ज कर दिया है, जबकि किसानों ने उतनी सामग्री ली ही नहीं।

जिला किसान कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन
जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष देवराज किशोर दास के नेतृत्व में 8 गांवों के सैकड़ों किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, ग्राम पिरचाटोला, बाजगुड़ा, खैरबना, डोकराभांटा, एटिकसा और भुरसाटोला के किसान जब अपना पुराना कर्ज चुकाने समिति पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा ऑनलाइन पोर्टल पर जो कर्ज दिखाया जा रहा है, वह किसानों के वास्तविक उठाव से कहीं अधिक है। किसानों ने बताया कि जिन किसानों ने 10 से 20 हजार रुपये का खाद लिया था, उनके नाम पर 25,000 से लेकर 1,00,000 रुपये तक का बकाया दिखाया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर:आदू राम साह 94,750 रुपये का कर्ज दर्ज। मूलचंद साहू 49,263 रुपये का कर्ज दर्ज, दीपक, संतराम और शत्रुहन साहू इनके नाम पर भी 33,000 से 38,000 रुपये के फर्जी आंकड़े चढ़ाए गए हैं।

तत्कालीन और वर्तमान प्रबंधन पर गंभीर आरोप
किसानों ने सीधे तौर पर तत्कालीन प्रबंधक (वर्तमान में निलंबित) विवेक कुमार मिश्रा और तत्कालीन ऑपरेटर व वर्तमान प्रभारी प्रबंधक जगमोहन जोशी को इस हेराफेरी का जिम्मेदार ठहराया है।। किसानों का कहना है, कि जब उन्होंने वर्तमान प्रबंधक जगमोहन जोशी से इस विसंगति पर सवाल किया, तो उन्होंने अभद्र व्यवहार करते हुए कहा, ‘जो करना है कर लो।’ किसानों का आरोप है, कि समिति के अधिकारियों ने कागजों में फर्जी परमिट काटकर खाद का गबन किया और उसका बोझ गरीब किसानों के सिर मढ़ दिया।

बयान लेकर लौट
जाती है जांच टीम
किसानों में प्रशासन के प्रति भी भारी असंतोष देखने को मिला। किसानों ने मीडिया को बताया कि इस मामले की शिकायत पहले भी की जा चुकी है, लेकिन जांच टीम केवल खानापूर्ति करती है। अधिकारियों द्वारा सिर्फ बयान दर्ज किए जाते हैं, परंतु आज तक किसी भी दोषी पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही फर्जी कर्ज को हटाकर दोषियों को जेल नहीं भेजा गया, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। न्याय की उम्मीद में किसान अब क्षेत्र के किसानों की नजरें प्रशासन की दो दिनों की जांच पर टिकी हैं। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इन रसूखदार प्रबंधकों पर कार्रवाई कर पाएगा या हर बार की तरह जांच की फाइलें धूल फांकती रह जाएंगी? फिलहाल, इस खुलासे के बाद से पूरे सहकारिता विभाग में हडक़ंप मचा हुआ है।

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