वर्षों से मलाईदार पदों पर जमे कर्मचारियों की होगी छुट्टी,
डॉ. ओमेश भगत और सुदेश रामटेके की नियुक्तियों पर उठे गंभीर सवाल
राजनांदगांव (दावा)। राजनांदगांव जिले के स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से चल रहे मनमाने संलग्नीकरण (अटैचमेंट) और प्रशासनिक अव्यवस्था का बड़ा खुलासा हुआ है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) द्वारा हाल ही में जारी संलग्नीकरण समाप्ति के आदेश ने विभाग के भीतर मचे भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण की परतों को उघाड़ कर रख दिया है। इस आदेश के बाद से उन अधिकारियों और कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गई है, जो नियमों को ताक पर रखकर मलाईदार पदों पर जमे हुए थे।
छुरिया में चिकित्सा अधिकारी की वीआईपी कार्यप्रणाली
विभागीय जांच और आदेश में सबसे चर्चित नाम डॉ. ओमेश भगत का है। मूल रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उमरवाही में पदस्थ डॉ. भगत को छुरिया जैसे महत्वपूर्ण ब्लॉक का खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) बनाया गया है। सूत्रों का दावा है कि डॉ. भगत रायपुर से आना-जाना करते हैं और सप्ताह में मात्र एक-दो दिन ही मुख्यालय पहुंचते हैं। उनके इस रवैये के कारण छुरिया का स्वास्थ्य तंत्र दो-तीन गुटों में बंट चुका है और अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय पूरी तरह खत्म हो गया है। अब देखना यह है कि क्या सीएमएचओ उन्हें वापस उमरवाही भेज पाएंगे या राजनीतिक दबाव आड़े आएगा।
नेत्र सहायक को सौंपी राष्ट्रीय कार्यक्रम की जिम्मेदारी
सूची में क्रमांक 12 पर दर्ज सुदेश रामटेके का मामला भी कम चौंकाने वाला नहीं है। मूल पद नेत्र सहायक अधिकारी होने के बावजूद रामटेके पिछले 5 वर्षों से सीएमएचओ कार्यालय में वैक्सीन वितरण का कार्य देख रहे थे। अब उन्हें अचानक जिला अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम का सहायक नोडल अधिकारी बना दिया गया है। जानकारों का सवाल है कि जो व्यक्ति वर्षों से नेत्र विभाग से दूर था, उसे इतने संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई?
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप
संलग्नीकरण के इस खेल का सबसे बुरा असर ग्रामीण जनता पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल में तीन नेत्र सहायक अधिकारियों को अटैच किए जाने के कारण मुरमुंदा, सोमनी और डूमरडीहकला जैसे केंद्रों में आंखों की ओपीडी लगभग बंद पड़ी है। ग्रामीणों को छोटी-छोटी जांच के लिए शहर की दौड़ लगानी पड़ रही है।
क्या सुधरेगी व्यवस्था?
विभागीय सूत्रों की मानें तो कई अटैचमेंट राजनीतिक दबाव और कथित लेन-देन के आधार पर किए गए हैं। सीएमएचओ का ताजा आदेश विभाग में सफाई की दिशा में एक साहसी कदम माना जा रहा है। यह आदेश केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कोशिश है। यदि इसका निष्पक्ष पालन हुआ तो ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर होगी। अब जिले की जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में जमे हुए दिग्गजों की उनके मूल पदों पर वापसी होती है।



