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समंदर के बीच महायुद्ध: अमेरिका-ईरान की जिद में फंसे सैकड़ों जहाज, खत्म हो रहा है राशन और पानी…

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पिछले कुछ हफ्तों से जारी नाकेबंदी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। समंदर के इस सबसे महत्वपूर्ण रास्ते पर ईरान और अमेरिका के बीच मची तकरार अब एक बड़े मानवीय और आर्थिक संकट में बदल चुकी है। ताजा वीडियो रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर सैकड़ों मालवाहक जहाज और तेल टैंकर लंगर डाले खड़े हैं। वे इस रास्ते के खुलने का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि ईरान ने आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगा रखी हैं, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है।

 

​20,000 नाविकों का जीवन दांव पर
इस नाकेबंदी का सबसे डरावना पहलू मानवीय संकट है। रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र में फंसे इन सैकड़ों जहाजों पर कम से कम 20,000 नाविक सवार हैं। ये नाविक पिछले कई दिनों से युद्ध जैसी स्थितियों के बीच फंसे हुए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि जहाजों पर राशन और ताजे पानी की भारी किल्लत हो गई है। नाविकों को सीमित राशन के सहारे खुद को जीवित रखने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। एपी (AP) द्वारा जारी किए गए वीडियो में दुनिया की तीसरी बड़ी शिपिंग कंपनी फ्रांस की CMA CGM के टैंकरों समेत कई जहाज कतार में खड़े नजर आ रहे हैं।

​कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
​होर्मुज ब्लॉकैड का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। जून डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड का भाव 1.3 प्रतिशत बढ़कर 109.64 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। यह लगातार सातवां दिन है जब तेल की कीमतें ऊपर गई हैं। 7 अप्रैल के बाद यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकेबंदी जल्द नहीं हटी, तो तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा।

​अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का बड़ा एक्शन
समंदर में तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि उसके गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर ‘यूएसएस राफेल पेराल्टा’ (USS Rafael Peralta) ने रविवार को एम/टी स्ट्रीम (M/T Stream) नामक जहाज को ईरानी बंदरगाह की तरफ जाने से रोक दिया। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सख्त नाकेबंदी लागू कर रखी है और वह किसी भी जहाज को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने नहीं दे रहा है। इस सैन्य टकराव के कारण युद्ध की स्थिति और अधिक जटिल हो गई है और शांति वार्ता की कोशिशें फिलहाल पूरी तरह से ठप नजर आ रही हैं।

​दुनिया भर में मची अफरा-तफरी
मार्च की शुरुआत से ही होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद पड़ा है। चूंकि यह मार्ग दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की ‘लाइफलाइन’ है, इसलिए दुनिया भर के देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। सप्लाई चेन टूटने से न केवल पेट्रोल-डीजल बल्कि गैस की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह संकट केवल दो देशों के बीच का नहीं रह गया है, बल्कि इसने पूरी दुनिया के शिपिंग उद्योग और अर्थव्यवस्था को ‘डेथ ट्रैप’ में धकेल दिया है।

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