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खैरागढ़: ‘हमर क्लिनिक’ शुरू होने से पहले ही राख, साजिश या हादसा? बिना बिजली कनेक्शन के कैसे भड़की आग…

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सवालों के घेरे में आग: अमलीपारा के ‘हमर क्लिनिक’ में संदिग्ध परिस्थितियों में लगी भीषण आग।

शॉर्ट सर्किट की थ्योरी फेल: CMHO का बड़ा बयान—भवन में बिजली कनेक्शन ही नहीं था।

सरकारी रिकॉर्ड स्वाहा: ‘चिरायु योजना’ से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और फाइलें जलकर खाक।

प्रशासनिक लापरवाही: लाखों की स्वास्थ्य सुविधा जनता को मिलने के बजाय बनी स्टोर रूम।

पूरी खबर: क्या फाइलों को मिटाने के लिए लगाई गई आग?

खैरागढ़ जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक 12, अमलीपारा में सोमवार देर रात एक बड़ी आगजनी की घटना हुई। लाखों की लागत से तैयार ‘हमर क्लिनिक’ का नवनिर्मित भवन, जो जनता के इलाज के लिए बनाया गया था, उद्घाटन से पहले ही जलकर खंडहर में तब्दील हो गया।

हैरानी की बात यह है कि जिस भवन में स्वास्थ्य सुविधाएं शुरू होनी थीं, वहां स्वास्थ्य विभाग ‘चिरायु योजना’ (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के दस्तावेजों को डंप कर रहा था। आग में ये सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।

 CMHO के बयान से मचा हड़कंप

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) आशीष शर्मा ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि भवन में अभी तक बिजली का कनेक्शन तक नहीं लिया गया था। ऐसे में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की दलील पूरी तरह खारिज हो गई है। अब पुलिस और स्थानीय लोग इसे सीधे तौर पर एक गहरी साजिश से जोड़कर देख रहे हैं।

 VIP वार्ड में सुरक्षा की पोल खुली

यह घटना उस वार्ड में हुई है जो राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यहाँ स्थानीय विधायक यशोदा निलांबर वर्मा और नगर पालिका अध्यक्ष गिरीजा चंद्राकर का निवास है। इतने हाई-प्रोफाइल इलाके में एक सरकारी भवन का जल जाना सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

 जनता का आक्रोश: “यह भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश है”

स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। नागरिकों का आरोप है कि भवन निर्माण के महीनों बाद भी इसे शुरू नहीं करना और वहां महत्वपूर्ण दस्तावेजों को लावारिस छोड़ देना किसी बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। लोगों ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।


❓ जवाब मांगते 4 अहम सवाल:

जब बिजली नहीं थी, तो रात के अंधेरे में आग कैसे लगी?

क्लीनिक को जनता के लिए शुरू करने के बजाय कागजों का ‘स्टोर रूम’ क्यों बनाया गया?

क्या चिरायु योजना के उन दस्तावेजों में कोई ऐसी जानकारी थी जिसे नष्ट करना जरूरी था?

लाखों की सरकारी संपत्ति के लिए कोई चौकीदार या सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी?

पुलिस का पक्ष: खैरागढ़ पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और संदिग्धों से पूछताछ जारी है।

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