० शासन स्तर पर पत्राचार किया गया – फुड इंस्पेक्टर गरिमा शोरी
डोंगरगढ़ (दावा)। इस माह विकास खंड के अंत्योदय कार्ड धारीयो को शासन द्वारा शक्कर उपलब्ध नहीं कराने से पूरे माह अंत्योदय कार्ड धारी परेशान रहे। वही दूसरी ओर प्राथमिकता वाले कार्ड धारियों को शक्कर दिया गया ऐसे में अंत्योदय कार्ड धारीयो ने राशन दुकान संचालकों पर आरोप लगाया कि शक्कर रहते हुए भी हमें शक्कर नहीं दिया गया।
फूड इंस्पेक्टर गरिमा शोरी से इस संबंध में जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि अंत्योदय कार्ड धारीयो के लिए शासन की ओर से ही शक्कर उपलब्ध नहीं कराया गया। आनलाइन सिस्टम में शक्कर की जानकारी नहीं आने के कारण उन्हें शक्कर देना संभव नहीं हो सका। यदि आज भी शासन की ओर से शक्कर उपलब्ध नहीं कराया जाता तो, इस माह का शक्कर अगले माह दिया जाएगा कि नहीं उसकी कोई गारंटी नहीं दी जा रही है। ऐसे में अंत्योदय की राह पर चलने वाली केंद्र व राज्य सरकार के कथनी व करनी पर प्रश्न खड़ा हो रहा है।
अंत्योदय का अर्थ है विकास की किरण को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना
सबसे निचले स्तर पर खड़े व्यक्ति का उत्थान या समाज के सबसे गरीब और पिछड़े व्यक्ति का विकास। यह दो शब्दों- ‘अंत्य’ (अंतिम/ सबसे पीछे) और ‘उदय’ (विकास/उन्नति) से बना है। यह विचारधारा ‘अंतिम व्यक्ति के उदय’ पर केंद्रित है, जिसका लक्ष्य वंचितों को सशक्त बनाना है। यह समाज में सबसे आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति के विकास को सुनिश्चित करने का दर्शन है। यह अवधारणा महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से प्रेरित है। इसका उद्देश्य गरीब से गरीब व्यक्ति का कल्याण, उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम बनाना। अंत्योदय अन्न योजना (्र्रङ्घ) के तहत, भारत सरकार सबसे गरीब परिवारों को बहुत ही कम दरों पर (जैसे, रु.2 किग्रा गेहूं, रु. 3 किग्रा चांवल) हर महीने 35 किलोग्राम राशन उपलब्ध कराती है। यह समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का एक मार्गदर्शक सिद्धांत है।



