० महज पांच ईंट भट्टों में करोड़ों ईंट का जखीरा
० राजस्व विभाग सहित अन्य विभाग निष्क्रिय
० एनजीटी अधिनियम के तहत हो कार्यवाई
डोंगरगांव (दावा)। कुमर्दा तहसील क्षेत्र के अंतर्गत जंगलों और पहाडिय़ों के नीच से अनेक अवैध ईंट भट्टों का संचालन हो रहा है. यही नहीं तहसील कार्यालय से महज एक किलोमीटर दूरी पर कुमरदा ग्राम के सरहद में ही ग्राम गोटाटोला पहाड़ी के नीचे एक ही स्थल पर पांच बड़े ईंट भट्टे संचालित हैं, जिसमें कई भ_ों के माध्यम से करोड़ों की संख्या में ईंट बनाए जा रहे हैं.
डोंगरगांव अनुभाग के अंतर्गत आने वाले कुमरदा तहसील में बैठे प्रशासनिक अधिकारी की निष्क्रियता के चलते इन ईंट भट्टों पर अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पाई है और बाहर से आये हुए प्रवासी कुम्हारों के नाम पर इन ईंट भट्टों की आड़ में ग्राम, जंगल की लकड़ी, बिजली, पानी सहित सभी संसाधनों का दोहन लगातार कर रहे हैं और इन ईंट भट्टों से शासन-प्रशासन और ग्राम पंचायतों को कोई लाभ नही हैं जबकि खनिज संपदा का उपयोग करने पर उन्हें रायल्टी, व्यावसायिक बिजली सहित ग्राम पंचायतों को टेक्स वसूलना चाहिए. इधर अवैध ईंट भ_ों के माध्यम से पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है जिसमें प्रशासनिक अधिकारी भी इस मामले में नाममात्र की कार्यवाही कर खानापूर्ति कर देते हैं जबकि एनजीटी 2010 अधिनियम के तहत इस पर कड़ी कार्यावाही किया जाना चाहिए. क्षेत्र के अधिकारियों के ढुलमुल रवैय्ये के चलते ईंट भट्टों की संख्या लगातार बढ़ रही है और पुराने ईंट भट्टे संचालित हैं उन्हें भी लगातार विस्तारित किया जा रहा है.
कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति
गत दिनों डोंगरगांव के अंतर्गत माहुलझोपड़ी में संचालित ईंट भट्टे में कार्यवाही की गई थी लेकिन केवल एक जगह के यह प्रशासन की कार्यवाही केवल खानापूर्ति बनकर रह जाती है और ईंट भ_ों के संचालक इसका मखौल उड़ाते हैं. इसे पूर्व भी पिछले वर्ष डोंगरगांव शहर के मटिया में कार्यवाही कर ईंट को जब्त किया गया था लेकिन कार्यवाही के बाद जब्त किये गए ईंटों का क्या हुआ यह सभी को पता है? जंगलों में चलने वाले इन ईंट भट्टों पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन को सभी विभागों के साथ मिलकर ठोस कार्यवाही कर एक उदाहरण प्रस्तुत करने की आवश्यक है ताकि इस तरह के गैर कानूनी तरीके से सभी संसाधनों का दोहन करने वालों पर अंकुश लगाया जा सके.
बाहरी लोग मुक्त में कर रहे हैं व्यापार
अवैध रूप से संचालित इन अधिकांश भट्टों में किसी भी प्रकार का एनओसी नहीं है और न ही ग्राम पंचायतों को इनसे किसी भी प्रकार का कोई आय है और ये सभी संरक्षण के चलते फलफूल रहे हैं. वहीं क्षेत्र में संचालित फ्लाई एश काला ईंट के अनेक लघु उद्यम बंद हो चुके हैं जबकि शासन-प्रशासन को इन उद्योगों से काफी लाभ था, सभी प्रकार के एनओसी और क्लीयरेंस के बाद लाखों रूपये की लागत से यह प्रदूषण मुक्त व्यापार प्रारंभ होता है, जिसमें लोकल मजदूरों को भी लगातार काम मिलता था जबकि बाहरी लोगों व्दारा मुक्त की जमीन, लकड़ी, बिजली, कोयला के लगातार प्रदूषण बढ़ाया जा रहा है और महंगे दामों में ईंटों को खपाया जा रहा है.
इस विषय को लेकर कुमरदा तहसीलदार विजय कोठारी से हमारे प्रतिनिधि चर्चा करने के लिए संपर्क कराना चाहा किन्तु कार्यालय में उपस्थित होते हुए भी कार्यालयीन समय का हवाला देकर मुख्यालय में नहीं होना बताया. वहीं जब मीडिया की टीम कुमर्दा तहसील कार्यालय पहुंची तो कार्यालय का दरवाजा अंदर से बंद पाया और दरवाजा खुलवाने पर तहसीलदार महोदय अपने चेंबर में बैठे कोई गोपनीय कार्य को अंजाम देते नजर आये. वहीं इस डोंगरगांव अनुभाग के एसडीएम श्रीकांत कोराम से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया किन्तु व्यस्तता के चलते उन्होंने भी कॉल रिसीव नहीं किया.



