राजनांदगांव (दावा)। देश के पोल्ट्री, डेयरी और एक्वा (मत्स्य पालन) उद्योग पर इनपुट लागत बढऩे के कारण एक गंभीर संकट मंडराने लगा है। ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर एसोसिएशन के अध्यक्ष बहादुर अली ने इस संबंध में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को एक विस्तृत मांग पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष बहादुर अली ने सरकार से जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) सोया मील के आयात की अनुमति देने और एक स्थायी मूल्य स्थिरीकरण तंत्र लागू करने का अनुरोध किया है।
० सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत में 30 प्रतिशत का अंतर
एसोसिएशन के अनुसार पत्र सूचना कार्यालय द्वारा 10 मार्च को जारी सरकारी अनुमानों में वर्ष 2025-26 के लिए सोयाबीन उत्पादन 127 लाख मीट्रिक टन दर्शाया गया है। जो कि पिछले वर्ष के 151 एलएमटी की तुलना में पहले से ही 17 प्रतिशत कम है। हालांकि जमीनी स्तर पर वास्तविक उत्पादन केवल 85 एलएमटी के आसपास ही प्रतीत हो रहा है। यह सरकारी अनुमानों से लगभग 30 प्रतिशत कम है। जिसके कारण पशु आहार (फीड) के मुख्य प्रोटीन स्रोत ‘सोया मील’ की देश में भारी किल्लत हो गई है।
० 77 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे दाम, उपभोक्ता भी प्रभावित
मांग पत्र में बताया गया है कि देश भर की फीड फैक्ट्रियों तक पहुंचने वाला 50 प्रतिशत हाई-प्रो सोया मील अब 77 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। कीमतों में रोजाना हो रही इस बढ़ोतरी से डेयरी, पोल्ट्री और मछली पालन करने वाले किसान भारी घाटे और घबराहट में हैं। फीड उद्योग के लिए भी इस लागत को वहन करना नामुमकिन हो गया है। जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है और बाजार में दूध, चिकन, अंडे तथा मछली के दाम बढ़ रहे हैं।
० एसोसिएशन ने मंत्रालय के समक्ष रखीं 3 प्रमुख मांगें
तत्काल आयात कोटा स्वीकृत हो: अगस्त 2021 के स्वीकृत कोटे में से बचे हुए 5.5 लाख टन के आयात की तुरंत अनुमति दी जाए। इसके साथ ही अक्टूबर में नई फसल आने तक संकट को थामने के लिए 15 एलएमटी जीएम सोया मील के अतिरिक्त आयात की मंजूरी दी जाए। उत्पादक और उपभोक्ता दोनों किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक ऐसा तंत्र बने, जिसके तहत जब भी सोयाबीन का बाजार मूल्य एमएसपी से 25प्रशित अधिक या 6,660 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर जाए, तो जीएम सोया मील का आयात स्वत: शुरू हो जाए। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में वेयरहाउसों पर कड़ाई से स्टॉक लिमिट लागू हो और स्टॉकिस्टों के लिए दैनिक/साप्ताहिक रिपोर्ट देना अनिवार्य किया जाए, ताकि कृत्रिम मूल्य वृद्धि को रोका जा सके। बहादुर अली ने कहा कि इन कदमों को उठाने से न केवल देश का पशुधन और फीड उद्योग बचेगा। बल्कि आयात शुल्कों के माध्यम से भारत सरकार को भी लगभग 450 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। जबकि देश के किसानों को उनकी फसल का एमएसपी से 25-30 प्रतिशत अधिक दाम मिलता रहेगा।



