सभी संसाधनों का जमकर हो रहा दोहन, पर्यावरण को पहुंच रहा भारी नुकसान, फिर भी जिम्मेदार विभाग मौन
सभी संसाधनों का जमकर दोहन-फिर कड़ी कार्यवाही क्यों नहीं?
डोंगरगांव (दावा)। अनुभाग डोंगरगांव के अंर्तगत सैकड़ों ईंट भ_ों का संचालन किया जा रहा है। जिसके एवज में प्रत्येक संबंधित लोग अपनी जेब गरम करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। वहीं इन अवैध ईंट भ_ों की कोई भी जानकारी शासकीय रिकार्ड में नहीं है। इसका खुलासा संबंधित विभाग लगाए गए सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी से हुआ है।
बता दें कि डोंगरगांव अनुभाग के अंतर्गत खनिज विभाग से यह जानकारी दी गई कि ईंट भ_ों की जानकारी चाही गई है, वह निरंक है। इस मामले में एक पत्रकार के द्वारा कुमरदा तहसील के अंतर्गत संचालित ईंट भ_ों की जानकारी चाही गई थी। जिस पर तहसीलदार कुमरदा ने आवेदन को खनिज विभाग को हस्तांतरित कर दिया था। वहीं खनिज विभाग के द्वारा आखरी समय में यह जानकारी दी गई कि चाही गई जानकारी निरंक है। राजस्व और खनिज विभाग की लापरवाही इस कदर होगी। इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, लेकिन जो बातें सामने आई वह चौंकाने वाला है। जानकारी के लिए बता दें कि डोंगरगांव अनुभाग के अंतर्गत कुमर्दा, केरेगांव, बीजेपार, बीजाभांठा, गिरगांव, मारगांव, माहुल झोपड़ी सहित अन्य पहाड़ी के नीचे बसे गांव में खुलेआम ईंट भ_ों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा खुज्जी से करमरी रोड, उमरवाही रोड, पिनकापर रोड में अनेक ईंट भ_े रोड के किनारे संचालित हैं। वहीं कुमरदा तहसील क्षेत्र तो इनका गढ़ बना हुआ है। जहां अधिकारियों की निष्क्रियता के चलते ये फल फूल रहे हैं।
पर्यावरण को पहुंचा रहे लगातार नुकसान
लाल ईंट बनाने के लिए लगातार पेड़ों की कटाई जारी है। जो इन ईंट भ_ों में लकड़ी का जखीरा गवाही देता है। इस मामले में न तो खनिज विभाग ने, न राजस्व ने, न ही वन विभाग ने और न ही पर्यावरण विभाग ने आज तक कोई कार्यवाहीं की है। इन अवैध ईंट भ_ों के संचालन कर्ताओं पर सभी विभागों के विभिन्न धाराओं के साथ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के तहत कड़ी कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता है।



