मानवता को कुचलने वाले क्रूर सिस्टम का संगठित अत्याचार उजागर
राजनांदगांव (दावा)। शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जितेंद्र मुदलियार ने सोमनी थाना क्षेत्र में नाबालिग किशोरी के साथ हुई अमानवीय घटना को प्रदेश की बदहाल व्यवस्था, बेलगाम पुलिस तंत्र और नकारे प्रशासनिक सिस्टम का भयावह चेहरा बताया है। उन्होंने कहा कि एक गरीब परिवार की मासूम बच्ची को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोमनी ने गलत रिपोर्ट देकर मानसिक सदमे में धकेल दिया। फिर पुलिस ने कानून और मानवता दोनों को कुचलते हुए पूरी रात थाने में बिठाकर उससे पूछताछ की। प्रताडि़त किया और महिला आरक्षक द्वारा मारपीट तक की गई। यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संवेदनहीनता और क्रूर सिस्टम का संगठित अत्याचार है।
मुदलियार ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के क्षेत्र में प्रशासनिक अराजकता चरम पर है। यहां गरीब, महिलाएं और नाबालिग तक सुरक्षित नहीं हैं। जिन लोगों को न्याय और सुरक्षा देनी चाहिए। वही लोग बच्ची के शरीर और आत्मसम्मान पर जख्म देने का काम कर रहे हैं। सरकार आखिर किस मुंह से सुशासन का दावा कर रही है। जब एक मासूम बच्ची को बिना गलती के अपराधियों की तरह प्रताडऩा झेलनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि पीडि़त परिवार ने उनसे मिलकर पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने परिजनों के साथ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर दोषियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन के निगरानी तंत्र की विफलता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मुदलियार ने कहा कि पेट दर्द की शिकायत पर किशोरी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोमनी ले जाया गया था। जहां जांच के बाद उसे गर्भवती घोषित कर दिया गया। इस गलत रिपोर्ट ने पूरे परिवार को मानसिक आघात पहुंचाया। बाद में मामला थाने पहुंचा तो पुलिस ने पहले उन्हें घर भेज दिया, लेकिन देर रात बच्ची को रिश्तेदार के घर से उठाकर थाने ले जाया गया और पूरी रात उसे परिजनों से दूर बैठाकर दबाव में पूछताछ की जाती रही। एक नाबालिग बच्ची भय और अपमान के बीच पूरी रात सहमी रही। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे दिन सखी सेंटर ले जाते समय महिला आरक्षक ने बच्ची से गाली-गलौच की और उसके साथ मारपीट भी की। बच्ची के शरीर पर चोट के निशान हैं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि बाद में चार अलग-अलग जांचों में बच्ची के गर्भवती होने की बात पूरी तरह गलत साबित हो गई। यानी एक गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पूरे सिस्टम ने नाबालिग और उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा, मानसिक स्थिति और आत्मसम्मान को रौंद डाला।
मुदलियार ने कहा कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि सत्ता के संरक्षण में पल रही संवेदनहीनता और क्रूरता का उदाहरण है। जिन लोगों ने यह मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा दी है। उन्हें केवल लाइन अटैच या नोटिस देकर नहीं छोड़ा जा सकता। दोषी स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिसकर्मियों और संबंधित अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त कर उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए। इस दौरान पीडि़ता के परिजनों के अलावा कांग्रेसजन उपस्थित थे।



