नेट और आरएफ स्टेटस एलईडी सिफ संचार संकेतक, वास्तविक खपत की गणना केवल केडब्ल्यूएच एलईडी से होती है
राजनांदगांव (दावा)। घरों में लगाए जाने वाले बिजली के आधुनिक स्मार्ट मीटरों को लेकर इन दिनों उपभोक्ताओं में तरह-तरह की भ्रांतियां और अफवाहें फैल रही हैं। सोशल मीडिया और आमचर्चा में दावा किया जा रहा है कि मीटर में निरंतर जलने-बुझने (ब्लिंक करने) वाली एलईडी लाइटों के कारण बिजली का बिल तेजी से बढ़ता है। लोगों में फैली इस भ्रामक धारणा और अफवाहों पर विराम लगाने के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की है। कंपनी ने बताया कि स्मार्ट मीटर की इन कम्यूनिकेशन लाइटों का बिजली बिल, विद्युत खपत या बिल की गणना से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। बिजली कंपनी ने उपभोक्ताओं से ऐसी भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न देने और केवल अधिकृत जानकारी पर ही विश्वास करने की अपील की है।
केंद्रीय सर्वर के बीच डेटा का आदान-प्रदान दर्शाती हैं लाइटें
पावर कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञों ने इस संदर्भ में वैज्ञानिक स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि स्मार्ट मीटर में दिखाई देने वाली नेट स्टेटस एलईडी और आरएफ स्टेटस एलईडी केवल संचार संकेतक (कम्युनिकेशन इंडिकेटर) हैं। इनका मुख्य कार्य जलते-बुझते हुए मीटर और कंपनी के केंद्रीय सर्वर के बीच डेटा ट्रांसफर की स्थिति को दर्शाना है। जब यह लाइट ब्लिंक करती है, तो इसका सीधा अर्थ यह होता है कि मीटर पूरी तरह सुरक्षित रूप से कंपनी के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है और अपनी मासिक रीडिंग व आवश्यक तकनीकी डेटा सर्वर को भेज रहा है। इन लाइटों के जलने-बुझने से उपभोक्ता की बिजली खपत या बिल की राशि पर रत्ती भर भी प्रभाव नहीं पड़ता है।
तो कैसे दर्ज होती है बिजली की वास्तविक खपत?
कंपनी ने साफ किया है कि घर में होने वाली बिजली की वास्तविक खपत का आकलन केवल मीटर में लगी केडब्ल्यूएच एलईडी लाइट के आधार पर ही किया जाता है। जब घर के भीतर पंखा, कूलर, एसी, फ्रिज या अन्य विद्युत उपकरण चालू किए जाते हैं, तब लोड के अनुसार यह लाइट तेजी से ब्लिंक करने लगती है और इसी के माध्यम से डिजिटल यूनिट दर्ज होती है। उपभोक्ताओं का मासिक बिजली बिल केवल इसी दर्ज यूनिट के आधार पर तैयार किया जाता है, न कि संचार व्यवस्था से जुड़ी अन्य लाइटों के आधार पर।
अंचल में लगभग सवा नौ लाख स्मार्ट मीटर सक्रिय
विद्युत कंपनी से मिली जानकारी के अनुसार स्मार्ट मीटर परियोजना के तहत अकेले राजनांदगांव संभाग व जुड़े जिलों में बड़े पैमाने पर मीटर सक्रिय किए जा चुके हैं। इसमें राजनांदगांव जिले में 1 लाख 96 हजार 141, कबीरधाम जिले में 6 लाख 303, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में 77 हजार 988 तथा मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी जिले में 53 हजार 64 स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। कंपनी का दावा है कि इस नई तकनीक से उपभोक्ताओं को एकदम सटीक और पारदर्शी बिलिंग का लाभ मिलेगा, जिससे मैन्युअल रीडिंग में होने वाली मानवीय त्रुटियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।
अफवाहों से बचें उपभोक्ता
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने आम जनता से पुरजोर अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर तैर रही किसी भी असत्यापित अफवाह पर भरोसा न करें। यदि किसी भी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली या बिलिंग को लेकर कोई शंका या शिकायत हो तो वह तत्काल अपने निकटतम विद्युत कार्यालय (बिजली दफ्तर) में संपर्क कर सकता है या कंपनी की अधिकृत हेल्पलाइन के जरिए सही व तकनीकी जानकारी प्राप्त कर सकता है।



