० महिला संविदा कर्मचारी ने वरिष्ठ कर्मी पर लगाया था गंभीर आरोप, जांच कमेटी और गणमान्यजनों की पहल पर हुआ सम्मानजनक समझौता
डोंगरगढ़ (दावा)। स्थानीय शासकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय प्रशासन को उस समय बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा। जब महाविद्यालय में कार्यरत एक महिला संविदा कर्मचारी ने संस्थान के ही एक वरिष्ठ कर्मचारी पर छेडख़ानी का गंभीर आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई। प्रभारी प्राचार्य के समक्ष प्रार्थिया का आवेदन प्रस्तुत होते ही प्रभारी प्राचार्य श्रीमती आशा चौधरी ने प्रशासनिक संवेदनशीलता दिखाते हुए अपने उच्च अधिकारियों के दिशा-निर्देश पर तत्काल एक आंतरिक जांच कमेटी का गठन कर दिया।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जांच कमेटी द्वारा बेहद गोपनीयता और गंभीरता के साथ सभी पक्षों से सघन विचार-विमर्श किया गया। अंतत: महाविद्यालय की गरिमा को सर्वोपरि मानते हुए दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से एक सम्मानजनक समझौता करा दिया गया। जांच कमेटी द्वारा लिए गए इस सूझबूझ पूर्ण निर्णय से पिछले कई दिनों से कॉलेज परिसर में चल रहे इस संवेदनशील विवाद का पटाक्षेप हो गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी शिकायत, शहर के प्रबुद्धजन भी आगे आए
मालूम हो कि जनभागीदारी समिति द्वारा नियुक्त इस महिला संविदा कर्मचारी द्वारा महाविद्यालय के वरिष्ठ कर्मचारी पर लगाए गए गंभीर आरोपों की लिखित शिकायत जैसे ही प्रभारी प्राचार्य श्रीमती आशा चौधरी से की गई। उसके कुछ ही समय बाद यह शिकायत पत्र सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हो गया। पत्र के वायरल होने से महाविद्यालय की प्रतिष्ठा और गरिमा पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा था तथा शहर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थी। मामले की गंभीरता को भांपते हुए महाविद्यालय परिवार, प्रबंध समिति और शहर के अनेक गणमान्य व प्रबुद्ध नागरिकों ने अथक प्रयास किए। सभी के सामूहिक हस्तक्षेप से दोनों पक्षों के मध्य सम्मानजनक समझौता संपन्न हुआ। जिससे अंतत: शिक्षा के इस बड़े केंद्र की गरिमा कलंकित होने से बच गई।
6 माह पूर्व ऐसे ही अन्य प्रकरण में संविदा प्राध्यापक पर गिरी थी गाज
महाविद्यालय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 6 महीने पहले भी इस संस्थान में ऐसा ही एक अन्य गंभीर मामला सामने आया था। उस समय कॉलेज में कार्यरत एक संविदा प्राध्यापक पर महाविद्यालय की ही एक छात्रा के साथ अश्लील हरकत करने का आरोप लगा था। तब महाविद्यालय प्रशासन ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की थी और गणित विषय के उक्त संविदा प्राध्यापक को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया था।



