जिला अस्पताल परिसर में भरा पानी, ममता नगर अंडरब्रिज लबालब होने से गाडिय़ां हुईं खराब, कैलाश नगर बस्ती पूरी तरह डूबी, कई घरों में घुसा गंदा पानी, रात भर जागते रहे लोग
राजनांदगांव (दावा)। जिले में पिछले तीन दिनों से मानसून की आमद के बाद शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। गरज-चमक के साथ हुई इस धमाकेदार बारिश से शहर का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं रहा। विशेषकर निचली बस्तियों के लिए यह बारिश आफत बनकर बरसी। शहर के अभिजात्य वर्ग का पुराना रिहायशी इलाका कैलाश नगर इस बार पूरी तरह डूबान में आ गया। यहां लोगों के घरों के भीतर तक बारिश का पानी घुस गया। जिससे नागरिकों को बेहद मुश्किल से जागकर रात काटनी पड़ी। हालांकि, इस तीन दिवसीय लगातार बारिश से भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को तापमान में गिरावट आने से राहत भी मिली है। वर्तमान में शहर का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है।
करोड़ों खर्च कर ऊंचा उठाया जिला अस्पताल परिसर हुआ लबालब
शनिवार दोपहर करीब 2 बजे गर्जन-तर्जन के साथ शुरू हुई मूसलाधार बारिश से करोड़ों रुपये खर्च कर ऊंचा उठाया गया जिला चिकित्सालय परिसर पूरी तरह पानी में डूब गया। अस्पताल परिसर और समीप स्थित डॉक्टर कॉलोनी में घुटनों तक पानी भर गया। अस्पताल के सामने स्थित बड़े नाले का गंदा और बदबूदार पानी परिसर में पसर जाने से मरीज और उनके परिजन बेहद परेशान रहे। इसके अलावा तहसील कार्यालय, पुराना एसपी कार्यालय, इंदिरा नगर सहित कई निचली बस्तियों में भारी जल-जमाव से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
निगम के ठीक सामने खूनी गड्ढे, हादसे का शिकार हो रहे लोग
शहर के अंदर की सडक़ें इस समय बेहद खतरनाक हो चुकी हैं। पोस्ट ऑफिस चौक और महावीर चौक स्थित अग्रवाल होटल (केंटिन) के समीप बने बड़े गड्ढे में पानी भर जाने से राहगीर उसमें गिरकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अग्रवाल केंटिन के पास का यह जानलेवा गड्ढा नगर निगम दफ्तर के ठीक सामने है, इसके बावजूद निगम प्रशासन ने इसे भरने की जहमत नहीं उठाई।
अंडरब्रिज में भरा पानी, गाडिय़ां हुईं बंद
शनिवार को रात भर हुई बारिश के कारण ममता नगर रोड स्थित रेलवे अंडरब्रिज में घुटनों से ऊपर तक पानी भर गया। जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। ब्रिज में पानी भरा होने के कारण कई चौपहिया और दुपहिया वाहन बीच में ही फंस गए। इंजनों में पानी घुसने से बंद हुई गाडय़िों को वाहन चालकों ने कड़ी मशक्कत के बाद पेल-धकेल कर बाहर निकाला। सडक़ों पर पानी भरा होने के कारण वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं हो रहा है, जिससे लगातार हादसे हो रहे हैं।
3 महीने सोता रहा निगम, अब बारिश में भेजे जा रहे प्रस्ताव
इस नारकीय स्थिति के लिए सीधे तौर पर नगर पालिक निगम की कार्यप्रणाली जिम्मेदार है। निगम प्रशासन भीषण गर्मी के तीन महीनों तक चैन की नींद सोता रहा। अब जब मानसून सिर पर आ गया और शहर डूबने लगा है। तब सडक़ों की मरम्मत, नाले-नालियों की सफाई और रोड कांक्रीटीकरण के प्रस्ताव शासन को मंजूरी के लिए भेजे जा रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि शासन की स्वीकृति बारिश का मौसम बीत जाने के बाद आएगी। तब तक शहरवासी इन डबरों और गड्ढों में चलने तथा घरों में नालियों का गंदा पानी भुगतने को मजबूर हैं।
जिले में वर्षा का आंकड़ा 1000 मिमी के करीब पहुंचा
राजस्व कार्यालय से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले में अब तक 700 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज हो चुकी थी। जो शनिवार की मूसलाधार बारिश के बाद अब 1000 मिमी के करीब पहुंचने का अनुमान है। भारी जल-जमाव के बाद अब जाकर निगम के सफाई कर्मचारी पानी निकासी के काम में जुटे हैं। भारी बारिश और नदी-नालों के उफान को देखते हुए जिला प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों और किसानों को नदी-नालों के किनारे न जाने की सख्त हिदायत दी है। किसी भी अप्रिय स्थिति या बाढ़ के हालातों से निपटने के लिए एनडीआरएफ की टीम और स्थानीय गोताखोरों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।



