300 का बिल सीधा 1200 पार, डेटा मिलने में देरी से रीडिंग लेट, कैलाश नगर डिवीजन के 1.61 लाख उपभोक्ताओं को लगा झटका
राजनांदगांव (दावा)। विद्युत मंडल द्वारा अंचल के उपभोक्ताओं को इस महीने थमाए गए भारी-भरकम बिजली बिलों ने आम जनता के होश उड़ा दिए हैं। लोगों के घरों में दो से तीन गुना तक अधिक बिल आने से उपभोक्ताओं में खासा आक्रोश और नाराजगी देखी जा रही है। इस अप्रत्याशित वृद्धि का सीधा दोष लोग घरों में लगाए गए नए स्मार्ट मीटरों को दे रहे हैं। उपभोक्ताओं का साफ आरोप है कि स्मार्ट मीटर इतने ज्यादा संवेदनशील हैं कि मोबाइल चार्जिंग की न्यूनतम खपत को भी तेजी से खींच रहे हैं। यहां तक कि मीटर में चौबीस घंटे जलने वाली लाल-नीली-पीली इंडिकेटर बत्तियां भी बिल में इजाफा कर रही हैं। हालांकि, बिजली कंपनी इन दावों को पूरी तरह नकारते हुए तकनीकी कैफियत दे रही है, लेकिन जेब पर पड़ी इस भारी मार के आगे उपभोक्ता अधिकारियों की दलीलों को मानने को तैयार नहीं हैं।
बता दें कि जिन मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों का बिजली बिल बामुश्किल 300 से 400 रुपये प्रति महीना आ रहा था, इस जुलाई महीने में वह सीधा 1200 से 1500 रुपये तक पहुंच गया है। कम आय वाले लोग इतना भारी बिल देखकर पसीने-पसीने हो रहे हैं। इस बढ़ोतरी के पीछे दो बड़े कारण सामने आ रहे हैं। पहला यह कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा जुलाई माह से घरेलू, गैर-घरेलू और अन्य सभी क्षेत्रों के लिए बिजली की दरों में वृद्धि कर दी गई है। घरेलू क्षेत्र में प्रति यूनिट दरों को 30 से 50 पैसे तक बढ़ा दिया गया है। बढ़ती महंगाई के बीच बिजली की कीमतों में इस इजाफे ने आम जनता की कमर तोडक़र रख दी है। जनता के इस गुस्से को भांपकर विपक्षी दलों ने भी इसे भुनाना और राजनीतिक मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है।
कैलाश नगर डिवीजन के अंतर्गत हाहाकार
अकेले राजनांदगांव शहर के कैलाश नगर डिवीजन के अंतर्गत आने वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कुल 1 लाख 61 हजार उपभोक्ता अनुमानित हैं। इन सभी उपभोक्ताओं को जो इस बार बिल प्राप्त हुए हैं, वे बजट बिगाडऩे वाले हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि भले ही विभाग इसे जून की खपत का बिल बता रहा है, लेकिन अगर जून का बिल दो से तीन गुना बढ़ा हुआ है, तो जुलाई की तपिश का बिल कितना खौफनाक होगा, यह सोचकर ही लोग परेशान हैं।
शिकायत है तो दफ्तर आएं
राजनांदगांव कैलाश नगर डिवीजन प्रमुख कौशलेंद्र पांडे का कहना है कि जून महीने की भीषण गर्मी के कारण घरों में कूलरों, एसी और पंखों का संचालन लगातार हुआ है, जिससे विद्युत की वास्तविक खपत ज्यादा हुई है। यही वजह है कि इस बार बिल बढ़ा हुआ मिल रहा है। यदि इसके बाद भी किसी उपभोक्ता को अपने बिल या मीटर रीडिंग को लेकर कोई शिकायत या संशय हो, तो वे सीधे कार्यालय आकर इसकी जांच करा सकते हैं।
चूक या चाल? रीडिंग में देरी से उपभोक्ताओं को लगी 2 से 3 हजार की चपत
खोजी पड़ताल में सामने आया है कि बिजली बिलों में इस अप्रत्याशित उछाल के पीछे केवल दरों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि विभाग की एक बड़ी तकनीकी लापरवाही भी जिम्मेदार है। जिसके मुख्य बिंदु में स्मार्ट मीटर का डेटा समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण इस बार उपभोक्ताओं के घरों की मीटर रीडिंग बेहद विलंब से शुरू हुई। सामान्य दिनों की तुलना में इस माह 4 और 5 जुलाई से रीडिंग का कार्य शुरू किया जा सका। जिससे बिलिंग सायकल के दिन बढ़ गए। दिन बढऩे के कारण उपभोक्ताओं की यूनिट खपत अगले स्लैब में चली गई। जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सीधे 2 से 3 हजार रुपये तक की अतिरिक्त चपत लग गई।



