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एबीस फर्म में 1.95 करोड़ से अधिक के गबन का मामला: सीनियर वाइस प्रेसिडेंट व पत्नी को सश्रम कारावास की सजा*

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राजनांदगांव (दावा)। मेसर्स एबीस एक्सपोर्ट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड में हुए करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी एवं गबन के मामले में अपीलीय न्यायालय (प्रधान सत्र न्यायाधीश, राजनांदगांव) ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अभियुक्त प्रमोद कुमार सिंह और उनकी पत्नी सीमा सिंह को विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। प्रकरण में छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से पैरवी जिला लोक अभियोजक राजेश खांडेकर द्वारा की गई।
क्या है पूरा मामला?
फर्जी डीलर की नियुक्ति: अभियुक्त प्रमोद कुमार सिंह (उम्र 51 वर्ष, निवासी कांदिवली, मुंबई), जो कंपनी में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत था, उसने नवंबर 2014 में बीएसएसपी वाणिज्यिक प्रतिष्ठान, गुजरात नाम की एक फर्जी संस्था का आवेदन पत्र भरकर नया डीलर नियुक्त कराया।
गबन और कूटरचना : उक्त फर्जी फर्म को कस्टमर नंबर 9140601 के रूप में दर्ज कर भिन्न-भिन्न तिथियों में मत्स्य एवं झींगा आहार का विक्रय किया गया। ऑडिट के दौरान फर्म पर रु. 1,73,24,868.47 की शेष राशि बकाया पाई गई। इसके अलावा, छूट एवं बोनस के नाम पर रु. 44,33,000 की राशि फर्जी तरीके से कस्टमर अकाउंट में जमा कराई गई।
जांच में फर्जीवाड़ा उजागर: सूरत (गुजरात) में पतासाजी करने पर उक्त नाम की कोई फर्म अस्तित्व में नहीं मिली। जिस एचडीएफसी बैंक मुंबई के खाते से लेनदेन किया जा रहा था, उसे प्रमोद सिंह की पत्नी सीमा सिंह द्वारा संचालित किया जा रहा था। अभियुक्तों ने कूटरचना कर कंपनी के साथ कुल रु. 1,95,27,030.47 (एक करोड़ पंचानबे लाख सत्ताईस हजार तीस रुपये सैंतालीस पैसे) की धोखाधड़ी की। प्रार्थी मोहम्मद आसिफ कुरैशी की शिकायत पर थाना लालबाग द्वारा अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना पश्चात भादंवि की धारा 420, 409, 467, 468, 471, 34 के तहत न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय का निर्णय एवं सजा का आदेश
निचली अदालत द्वारा 11 नवंबर 2024 को दोनों अभियुक्तों को 03-03 वर्ष के सश्रम कारावास तथा रु. 500-500 के अर्थदंड से दंडित किया गया था। इस सजा को विधि के प्रावधानों के अनुरूप अपर्याप्त मानते हुए जिला दंडाधिकारी राजनांदगांव की ओर से सत्र न्यायालय के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई थी।
अपीलीय न्यायालय का अंतिम फैसला
माननीय प्रधान सत्र न्यायाधीश विजय कुमार होता द्वारा अभिलेखों के परिशीलन और पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 23 जून 2026 को निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए निम्नानुसार सजा का आदेश पारित किया गया जिसमें अभियुक्त प्रमोद कुमार सिंह को धारा 409, 420/34, 467/34, 468/34, 471/34 भादंवि के तहत 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं रु. 1,000-1,000 का अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1-1 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास)। धारा 409 भादवि के अंतर्गत दी गई सजा अन्य शेष धाराओं की सजा से पृथक (अलग से) भुगतायी जाएगी।
अभियुक्ता सीमा सिंह को धारा 420/34, 467/34, 468/34, 471/34 भादंवि के तहत 2-2 वर्ष का सश्रम कारावास एवं रु. 1,000-1,000 का अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1-1 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास)। की सजा सुनाई है।

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