बूढ़े-बच्चे जवान सभी रख रहे रोजा, पढ़ी जा रही नमाज
राजनांदगांव(दावा)। बारिश के दिनों में गायों को रोटी खिलाना तथा भीषण गर्मी के दिनों में रोजा रखना काफी पूण्य दायक कार्य माना जाता है। इन दिनों देश में ही नहीं पूरे विश्व में कोरोना संकट छाया हुआ है। कोरोना वायरस के फैलाव से बचने सभी जगह लाक डाउन की स्थिति बनी हुई है। ऐस में कुछ अति आवश्यक कार्यों को छोड़ दे तो कोई भी अपने घरों में बाहर नही निकल पा रहे है। मंदिर मस्जिद गिरजाधर गुरूद्वारे सभी सूने पड़े हैं। इस आफत काल के समय मुस्लिम भाइयों का सबसे पवित्र व कठिन व्रत (रोजा) रखने वाला माह रमजान पेश हुआ है। एक ओर भीषण गर्मी दूसरी ओर कोरोना वायरस का खतरा व लाक डाउन की स्थिति के बीच तमाम रोजाबंदो को अपने घरों में ही रह कर पांचों वक्त की नमाज अता करनी पड़ रही है। मुसलमान भाई अपने घर परिवार के लोगों सहित मस्जिदो में न जाकर अपने-अपने घरो में नमाज पढ़ रहे है। दिन भर रोजा रख कर अल्लाह को याद किया जा रहा है। मोमिन जन अल्लाह से पूरे विश्व में महामारी का रूप धारण कर चुके कोरोना के नाश के लिए इबादत कर रहे हैं।
रमजान का पवित्र महिना शुरू होने के बाद रोजा आरंभ है। मुस्लिम भाई सुबह साढे तीन बजे से उठकर सेहरी करते हैं। इसके बाद रोजा चालू हो जाता है। नगर के समाजसेवी व अधिवक्ता एच.बी. गाजी ने बताया कि रोजा के बंदेगारों द्वारा सुबह फजर की नमाज 5:15 में की जाती है। इसके बाद दोपहर में 1.30 बजे जौहर की नमाज अता की जाती है। शाम 5:15 बजे असर की नमाज तथा 6:30 बजे मगरीब की नमाज पढ़ी जाती है। लाक डाउन के चलते इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम अपने घरों में ही दिया जा रहा है। श्री गाजी ने बताया कि पवित्र रमजान माह में रोजाना रोजा खोलने का समय शाम 6:33 बजे है। इसके बाद 8:15 बजे इसर का नमाज अता किया जाता है तत्पश्चात 8:30 बजे तरावीह की नमाज अता की जाती है। इस तरह मोमिन जनों का पूरा दिन व रात अल्लाह की याद में कट रहा है। इन दिनों शहर के मस्जिद रंग बिरंगी रौशनियों से जगमगा रहे है। सायरन के आवाज के साथ सभी फर्ज के नमाज अता करने की सूचना दी जा रही है।
बच्चे भी रख रहे रोजा
पुराना गंज चौक निवासी परिवहन व्यवसायी हमीद भाई सोलंकी के परिवार में छोटे-छोटे बच्चे भी रोजा रख रहे है। उनके द्वारा पांचों वक्त के नमाज भी पढ़ी जा रही है। पांच वर्षीय सविहा फातिमा, साढ़े तीन साल की इरम फातिमा व 4 साल की रीदा कौसर ने बताया कि उन्हें अल्लाह की याद में रोजा रखना तथा सभी फर्ज के नमाज अदा करना अच्छा लगता है। सोलकी परिवार के हासम भाई ने बताया कि सुबह सेहरी के बाद रोजा प्रारंभ कर दिन भर उपवास के पश्चात शाम को इफ्तार में पानी और भोजन ग्रहण किया जाता है। उन्होंने बताया कि रोजा में 12 घंटे का कठोर उपवास होता है जिसमें एक बूंद पानी भी गले से नहीं उतार सकते। भीषण गर्मी के दिनों में रह-रह कर गला सूखता जाता है। लेकिन अल्लाह की याद में यह कठिन तपस्या करने में किसी को कोई परेशानी नहीं होती। सबका अल्लाह मालिक है। इबाद से हौसला मिलता है।
कोरोना के साये में रमजान माह
सोलंकी परिवार के हनीफ भाई व हन्नु भाई ने बताया कि लाकडाउन के बाद भी कई स्थानों से शादी के निमंत्रण आ रहे है जिसमें विशेष कर लिखा गया है पैगम्बर मोहम्मद को न मानने वाले गुस्ताखे रसूल देवबंदी, बहावी व तबलीगी जमात के लोग शादी में न आए और न शामिल हो। उन्होंने बताया कि इन जमातियों के कारण समस्त मुसलमान भाइयों को बदनाम होना पड़ रहा है। यदि तबलीगी जमातियों की कोरोना वायरस फैलाने वाला हरकत नहीं होती तो भारत में कोरोना के इतने केस नहीं बढ़ते। लोगों की मौते नहीं होती। बहुत पहले ही देश से लाक डाउन हट गया होता और हम समस्त मुसलमान भाई अपने घरों के बजाय खुले दिल से मस्जिदों में नमाज अता करते होते। पवित्र रमजान माह में रोजे की बहार होती। मुस्लिमजनों में पर्व उल्लास बना रहता लेकिन कुछ लोगों की गलती ने पूरे समुदाय को शर्मसार कर दिया। बहरहाल लाक डाउन के चलते सभी धार्मिक स्थलों पर ताले लगे हुए है। लेकिन परम्परा व आस्था बरकरार है। लाक डाउन के दौरान अन्य तीज त्यौहारों की तरह रमजान का महिना भी मुस्लिम जन अपने घरों में मना रहे है और रोजा रखने के साथ घरों में ही नमाज अदा की जा रही है।




