विभाग के प्रमुख अधिकारी पर उठ रही उंगली
इस संबंध में पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के जिलाधिकारी सहायक संचालक अनूप चटर्जी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया। कई बार फोन किए जाने के बावजूद उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद भी उनकी ओर से कोई कॉल बैक नहीं किया गया। विभाग से जुड़े गंभीर आरोपों पर अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आ सका है।
राजनांदगांव (दावा)। जिले में पशुपालन और डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का लाभ पशुपालकों तक कितना पहुंच रहा है। यह अब सवालों के घेरे में है। पशु चिकित्सा एवं सेवाएं विभाग की कथित लापरवाही के चलते जिले में डेयरी व्यवसाय के सामने संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। वहीं दूसरी ओर कई गांवों में मवेशियों के बीमार होने और उपचार के अभाव में उनकी मौत होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। पशुपालकों का आरोप है कि गांवों में संचालित पशु औषधालयों और वहां पदस्थ पशु चिकित्सा सहायकों की नियमित उपलब्धता को लेकर गंभीर स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों को शासन की ओर से आवास अथवा मकान किराए की सुविधा मिलने के बावजूद उनके मुख्यालय में नहीं रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कई कर्मचारी अपने शहरी निवास अथवा निजी गांवों से आवागमन करते हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय स्तर पर पंच-सरपंच से प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर मकान किराया लेने की बात भी कही जा रही है। यदि यह आरोप सही हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय किया जाना आवश्यक है। पशुपालकों का कहना है कि मवेशियों के बीमार पडऩे पर समय पर सरकारी पशु चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाने के कारण उन्हें निजी स्तर पर इलाज कराना पड़ता है। कई मामलों में पशुपालकों से उपचार के नाम पर बड़ी रकम वसूले जाने की शिकायत भी सामने आती है। आर्थिक रूप से कमजोर पशुपालकों के लिए महंगा उपचार कराना मुश्किल हो जाता है और वे मजबूरी में घरेलू स्तर पर ही अपने मवेशियों का इलाज करने का प्रयास करते हैं। पशुपालकों का कहना है कि जब महंगे पशुओं का समय पर उपचार नहीं हो पाता तो बीमारी बढऩे के साथ पशु की हालत गंभीर हो जाती है।
गाय, बैल, भैंस और बछड़ों के बीमार होने तथा उपचार के अभाव में उनकी मौत की घटनाएं पशुपालकों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन रही हैं। शासन का उद्देश्य पशुपालन को आधुनिक एवं लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना, उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। डेयरी व्यवसाय से ग्रामीण परिवारों को नियमित आय उपलब्ध कराने के लिए भी विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती हैं।
लेकिन पशुपालकों का कहना है कि जब बुनियादी पशु चिकित्सा सुविधा ही समय पर उपलब्ध नहीं होगी तो उन्नत पशुपालन और डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने की योजनाएं धरातल पर कैसे सफल होंगी। पशुपालकों का कहना है कि पशुओं की बीमारी और इलाज के बढ़ते खर्च के कारण कई लोग पशुपालन से पीछे हटने लगे हैं। कुछ पशुपालक अपने मवेशियों को दूसरों को दान करने या मजबूरी में खुले में छोडऩे तक के लिए विवश हो रहे हैं। इससे आवारा मवेशियों की समस्या भी बढ़ सकती है और सडक़ दुर्घटनाओं सहित अन्य समस्याएं पैदा होने की आशंका बनी रहती है। पशुपालकों ने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ पशु चिकित्सा सहायकों एवं अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी जांच की मांग की जा रही है कि जिन कर्मचारियों को मुख्यालय में रहने के नाम पर मकान किराया दिया जा रहा है, वे वास्तव में संबंधित मुख्यालय में निवास कर रहे हैं या नहीं। पशुपालकों ने फील्ड में सरकारी जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर निजी स्तर पर उपचार किए जाने और इसके एवज में राशि लिए जाने की शिकायतों की भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी व्यवस्था में उपचार और दवाइयां उपलब्ध हैं तो पशुपालकों को निजी खर्च करने की नौबत नहीं आनी चाहिए।
पशुपालकों का कहना है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए। साथ ही पशु औषधालयों में कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, दवाइयों की उपलब्धता, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पशुओं की मौत से जुड़े मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। जिले के पशुपालकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कहीं लापरवाही, अनियमितता अथवा सरकारी सुविधा का दुरुपयोग पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। पशुपालकों का कहना है कि समय पर उपचार और विभागीय सहयोग मिलने से न केवल मवेशियों की जान बचाई जा सकती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी एवं पशुपालन व्यवसाय को भी दोबारा मजबूती दी जा सकती है।



