० बीस में से 18 सदस्यों ने कलेक्टर के पास प्रस्तुत किया अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन
० जनपद उपाध्यक्ष मनीष साहू को हटाने पक्ष-विपक्ष दोनों लामबंद, प्रस्ताव में अध्यक्ष के हस्ताक्षर ने चौंकाया
डोंगरगांव (दावा)। बीते एक दशक के बाद जनपद पंचायत डोंगरगांव में भाजपा मुश्किल से सत्तासीन हो पाई है, लेकिन यह खुशियां साल भर में ही काफूर होने की स्थिति में है। यहां भाजपा समर्थित जनपद उपाध्यक्ष तथा कद्दावर नेता मनीष साहू को पद से हटाने पक्ष-विपक्ष दोनों ही लामबंद हो गए हैं। श्री साहू के प्रति अविश्वास जताते हुए बीस सदस्यीय जनपद सभा के अ_ारह सदस्यों ने सोमवार को अविश्वास की सूचना में हस्ताक्षर कर सूचना पत्र कलेक्टर को प्रस्तुत कर दिया है। अब देखना यह है कि विहित प्रधिकारी कलेक्टर इस मामले में क्या और कब तक निर्णय देते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अविश्वास प्रस्ताव में अध्यक्ष रंजीता पटौती सहित शेष सभी भाजपा समर्थित सदस्यों के हस्ताक्षर हैं, जबकि मात्र दो जिनमें उपाध्यक्ष मनीष साहू और एक मात्र सदस्य जयातिमेश साहू के हस्ताक्षर नहीं हैं।
ठेकेदारी और मद के आबंटन में मनमानी का लगाया आरोप
सोमवार को कलेक्टर एवं विहित प्रधिकारी राजनांदगांव को सौंपे आवेदन में अविश्ववास प्रस्ताव में उपाध्यक्ष श्री साहू पर शासन द्वारा स्वीकृत धर्मस्थ विभाग के निर्माण कार्यों को ग्राम पंचायत के सरपंचों पर दबाव देकर ठेेकेदारी करना तथा पंद्रहवें वित्त आयोग में जनपद पंचायत के प्राप्त अंश को अपने क्षेत्र में अधिक तथा बंदरबांट एवं आबंटित जलाशयों में अनियमितता सहित शिक्षा समिति के प्रस्ताव को सामान्य सभा में नहीं रखने सहित सदस्यों के साथ पक्षपात एवं अभद्रतापूर्ण व्यवहार को आधार बनाया है। इस मामले में दोनों ही दल अब एक होकर उपाध्यक्ष को हटाने का मन बना लिया है। बता दें कि पहले भी जनपद में खटपट की खबरें लगातार आते रही हैं। वहीं अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के मध्य मतभेद अब खुलकर सामने आ गया है। ऐसे में यह प्रस्ताव कब तक पटल पर आयेगा यह विहित प्राधिकारी कलेक्टर को तय करना है। बता दें कि बीस सदस्यीय डोंगरगांव जनपद पंचायत में 13 सदस्य भाजपा समर्थित हैं जबकि शेष 7 कांग्रेस के हैं। वहीं भाजपा के 13 में से 11 अविश्वास के पक्ष में अभी दिखाई दे रहे हैं, हालाकि भविष्य में क्या होगा यह अभी अस्पष्ट है।
गुटबाजी का नतीजा है या वर्चस्व की लड़ाई
बता दें कि जनपद चुनाव के कुछ दिनों के बाद से ही जनपद में गहमागहमी तथा आपसी मनमुटाव की खबरें आती रही हैं। वहीं निर्माण कार्यों में ठेकेदारी तथा फंड के आबंटन में मनमानी का आरोप सत्ता पक्ष में ही एक दूसरे को लगाते रहे हैं। इनमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच लकीर पहले ही खींच गई थी। वहीं बात करें गुटबाजी की तो भाजपा के सभी सदस्यों के मध्य गुटबाजी थी तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के आशीर्वादकों की भूमिका भी शून्य नजर आ रही है। जो अपने कार्यकर्ताओं को संभाल नहीं पा रहे हैं। वहीं भाजपा पाटी कैसे डेमेज कंट्रोल करती है, यह अब उनका अंदरूनी मामला है, परन्तु इस अविश्वास प्रस्ताव के सार्वजनिक होने के बाद भाजपा की बंद मु_ी अब साफ खुली दिखायी दे रही है। जिसे कांग्रेस समर्थित सदस्य अब लपकने की तैयारी में हैं।
इस मामले में जनपद पंचायत अध्यक्ष रंजीता पटौती से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष से संपर्क करने का प्रयास किया गया किन्तु उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया. वहीं जनपद पंचायत उपाध्यक्ष मनीष साहू ने इस पूरे मामले से अनभिज्ञता जाहिर की और उन्होंने कहा कि किसी भी सदस्य को उनसे शिकायत थी, तो पहले उनसे बात किया जाना चाहिए था।



