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राजनांदगांव में साइबर ठगी के म्यूल अकाउंट पर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: 5.41 लाख के अवैध लेन-देन का खुलासा, 1 आरोपी गिरफ्तार…

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राजनांदगांव। थाना सिटी कोतवाली पुलिस और साइबर सेल राजनांदगांव की संयुक्त टीम ने साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो रहे म्यूल बैंक खातों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने 5,41,099 रुपये के साइबर फ्रॉड की रकम खपाने वाले 1 म्यूल अकाउंट धारक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

समन्वय पोर्टल से हुआ खुलासा गृह मंत्रालय, भारत सरकार के ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (I4C) के समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस ने ऐसे संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित किया था, जिनका उपयोग साइबर ठगी की अवैध कमाई के लेन-देन, उपयोग और हेरफेर के लिए किया जा रहा था।

जांच में पाया गया कि संबंधित बैंक खाते के जरिए ₹5,41,099 की अवैध राशि का ट्रांजैक्शन किया गया। खाता धारक को यह भली-भांति ज्ञात था कि यह रकम धोखाधड़ी से अर्जित की गई है, फिर भी अवैध लाभ के लिए खाते का इस्तेमाल किया जा रहा था।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर एवं नगर पुलिस अधीक्षक सत्यप्रकाश तिवारी के मार्गदर्शन में सिटी कोतवाली प्रभारी उपेन्द्र कुमार शाह तथा साइबर सेल प्रभारी विनय पम्मार के नेतृत्व में टीम गठित कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

थाना सिटी कोतवाली में अपराध क्रमांक 562/26 धारा 317(4), 317(5), 3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज कर 20 सितंबर 2026 को आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया। मामले में अन्य संलिप्त आरोपियों की तलाश जारी है।

गिरफ्तार आरोपी:

दीपक शर्मा (58 वर्ष), पिता स्व. मुरलीधर शर्मा, निवासी मुकुरुम खदान लखोली अटल आवास, थाना कोतवाली, जिला राजनांदगांव (छ.ग.)।

जानिए क्या होता है म्यूल अकाउंट और कैसे काम करता है?

क्या है म्यूल अकाउंट: यह एक ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी की अवैध रकम को छुपाने, एक खाते से दूसरे खाते में भेजने या कैश निकालने के लिए करते हैं।

कैसे होता है इस्तेमाल: अपराधी किसी व्यक्ति को थोड़े पैसों, कमीशन या अन्य लालच देकर उसका बैंक खाता इस्तेमाल करने की अनुमति लेते हैं। फिर ठगी का पैसा उसमें जमा कराकर कई खातों में बांट देते हैं ताकि पुलिस जांच से बचा जा सके।

कौन बनता है शिकार: आर्थिक रूप से कमजोर लोग जिन्हें पैसों का लालच दिया जाता है, या फिर वे लोग जो जानबूझकर थोड़े से कमीशन के चक्कर में अपराधियों का साथ देते हैं।

म्यूल अकाउंट से बचने के उपाय

किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम न दें।

बिना मेहनत या अचानक बड़ी रकम/कमीशन मिलने के झांसे में न आएं।

अपने बैंक स्टेटमेंट और लेन-देन की नियमित जांच करते रहें।

किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल को सूचित करें।

राजनांदगांव पुलिस की अपील: राजनांदगांव पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि अपना बैंक खाता, सिम या एटीएम कार्ड किसी को भी किराए पर या इस्तेमाल के लिए न दें। साइबर अपराधी इनका उपयोग गेमिंग, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ट्रेडिंग और सेक्सटर्शन जैसी ठगी में करते हैं। ऐसा करना कानूनन अपराध है और पुलिस खाता देने वालों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी।

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