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अघोषित ‘लोड शेडिंग’ ने तोड़ी औद्योगिक क्षेत्रों की कमर : बिजली विभाग की लापरवाही से उद्योग बंदी की कगार पर, करोड़ों का नुकसान…

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बार-बार ट्रिपिंग और 5 से 10 घंटे की कटौती से कच्चा माल नष्ट, री-स्टार्ट प्रक्रिया ने बढ़ाई लागत*

*० सीएसपीडीसीएल के नियमों की उड़ रही धज्जियां; बिना पूर्व सूचना बिजली गुल होने से पावर फैक्टर पेनल्टी की दोहरी मार*

*० राजनांदगांव जिले के सोमनी, टेड़ेसरा, सांकरा, टोलागांव व डोंगरगांव समेत कई क्षेत्रों में हाहाकार; हजारों श्रमिकों के रोजगार पर गहराया संकट*
राजनांदगांव (दावा)। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कंपनी की बदहाल व्यवस्था और चरमराती कार्यप्रणाली ने स्थानीय उद्योगपतियों की कमर तोडक़र रख दी है। बिना किसी पूर्व सूचना के दिनभर में कई-कई बार हो रही बिजली कटौती और 5 से 10 घंटे तक चलने वाली अघोषित ‘लोड शेडिंग’ के कारण कारखानों का संचालन पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। रोजाना हो रहे करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान के चलते अब कई उद्योग ताला लगाने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हजारों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
*‘कंटिन्यूअस प्रोसेस’ प्लांट्स पर सबसे बड़ा आघात*
ग्राम सोमनी (खुटेरी) स्थित खाद्य तेल कारखाने (सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन प्लांट एवं रिफाइनरी) के संचालकों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि उच्च दाब पर चलने वाले ये संयंत्र ‘कंटिन्यूअस प्रोसेस’ (सतत प्रक्रिया) पर आधारित होते हैं। उत्पादन के दौरान अचानक बिजली गुल होते ही पूरा सिस्टम क्रैश हो जाता है।
कच्चे माल और केमिकल का भारी नुकसान: बिजली जाते ही अत्यंत ज्वलनशील व उडऩशील पेट्रोलियम पदार्थ ‘हेक्जीन’ (सॉल्वेंट) सैकड़ों लीटर की मात्रा में वाष्पीकृत होकर हवा में उड़ जाता है।
*लंबा री-स्टार्ट समय:* ट्रिपिंग के बाद पूरे संयंत्र को दोबारा सामान्य परिचालन स्तर पर लाने में कम से कम 4 घंटे का समय, भारी मात्रा में अतिरिक्त बिजली और अतिरिक्त मैनपॉवर व्यय होता है।
*गुणवत्ता पर असर:* प्रक्रिया बीच में रुकने से तैयार माल की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है, जिसके चलते उत्पादकों को उसे बाजार में औने-पौने दामों पर बेचने के लिए विवश होना पड़ता है।
नियमों को ताक पर रख रहा विभाग, उद्योग झेल रहे दोहरी मार
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (सीएसपीडीसीएल) के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि आकस्मिक तकनीकी खराबी को छोडक़र उच्च दाब (एलटी) उपभोक्ताओं को किसी भी शटडाउन या मेंटेनेंस की सूचना पहले से दी जानी चाहिए। इसके उलट, बीते एक माह से बिना किसी अलर्ट के दिन में दर्जनों बार ट्रिपिंग की जा रही है।
बार-बार बिजली जाने और आने से संयंत्रों का ‘पावर फैक्टर’ गिर जाता है। विडंबना यह है कि बिजली विभाग की इस अव्यवस्था का खामियाजा भी उद्योगपतियों को अतिरिक्त आर्थिक दंड (पेनल्टी) के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
*जिले के सभी प्रमुख औद्योगिक बेल्ट प्रभावित*
विद्युत संकट का यह भयावह असर सिर्फ सोमनी तक ही सीमित नहीं है। जिले के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों—टेड़ेसरा, सांकरा, इंदामरा, टोलागांव और डोंगरगांव में संचालित राइस मिलें, पेपर मिलें, साल्वेंट प्लांट्स और पोल्ट्री फार्म्स इस संकट से सबसे ज्यादा त्रस्त हैं। पोल्ट्री उद्योग में वेंटिलेशन और तापमान नियंत्रण बाधित होने से बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है, वहीं राइस और पेपर मिलों का उत्पादन चक्र पूरी तरह लडख़ड़ा चुका है।
*उद्योगपतियों का अल्टीमेटम: निर्बाध आपूर्ति मिले या चाबियां संभाले प्रशासन*
स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि बिजली कंपनी के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते वे हर दिन लाखों रुपये का घाटा सहन करने की स्थिति में अब बिल्कुल नहीं हैं। यदि विभाग ने तुरंत प्रभाव से अघोषित कटौती और ट्रिपिंग पर अंकुश लगाकर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की, तो उद्योगों में स्थायी तालाबंदी के सिवा कोई विकल्प नहीं बचेगा। उद्यमियों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर जिले की औद्योगिक इकाइयों और श्रमिकों के भविष्य को बर्बाद होने से बचाया जाए।

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