सांसद ने प्रेस वार्ता में राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- ‘कोरा में लइका अउ गांव भर ढिंढोरा’ जैसी राजनीति कर रहा विपक्ष
चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से बेनकाब हुआ विपक्ष
सांसद संतोष पाण्डे ने स्पष्ट किया कि 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. एस.एस. संधू एवं डॉ. विवेक जोशी की उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसके बाद चुनाव आयोग ने संयुक्त प्रेस नोट जारी कर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। देश भर में संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) सहित सभी महत्वपूर्ण निर्णय पूरे आयोग की पूर्ण सहमति और सर्वसम्मति से लिए गए हैं। 24 जून 2025 का मूल आदेश हो या 12 व 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी समय-सारणी, सब पर तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी 27 मई 2026 को इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराया है। इसके बावजूद विपक्ष आयोग की निष्पक्षता पर कीचड़ उछालने का प्रयास कर रहा था।
कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे पत्र और फॉर्म-6 पर फैलाई गई झूठी कहानी
सांसद ने कहा कि एक अंग्रेजी दैनिक की निराधार रिपोर्ट के सहारे विपक्ष ने संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाने की कोशिश की। आयोग ने साफ किया है कि कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजा गया पत्र आयोग की नीति या एसआईआर से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़ा आंतरिक विषय था। वहीं फॉर्म-6 को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर भी स्थिति स्पष्ट है कि एसआईआर के घोषणापत्र को सुप्रीम कोर्ट पहले ही वैध घोषित कर चुका है और सामान्य अवधि के लिए निर्वाचन पंजीयन नियम 1960 के तहत पूर्ववत फॉर्म ही लागू हैं।
राजनांदगांव (दावा)। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त एवं दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेद को लेकर कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक दावों पर सांसद संतोष पाण्डे ने कड़ा प्रहार किया है। जिला भाजपा अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव एवं भाजपा नेता भरत वर्मा की उपस्थिति में आयोजित पत्रकार वार्ता में सांसद पाण्डे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने की हताशा में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी हर बार मुंह की खाते हैं, इसके बावजूद जनता को मनगढ़ंत कहानियों से बरगलाने की उनकी आदत नहीं जा रही। सांसद पाण्डे ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी नेता राहुल गांधी ‘कौवा कान ले गया’ की कहावत को चरितार्थ करते हैं और बिना सच जाने वितंडा खड़ा कर देते हैं। उन पर छत्तीसगढ़ी की मशहूर कहावत ‘कोरा में लइका अउ गांव भर ढिंढोरा’ बिल्कुल सटीक बैठती है। किसी भी तथ्य की जांच किए बिना झूठ की राजनीति करने के कारण विपक्ष को लगातार जनता की अदालत में शिकस्त का सामना करना पड़ रहा है।
सांसद श्री पाण्डे ने राहुल गांधी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि हार की खीझ में संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना विपक्ष की फितरत बन चुकी है- ईवीएम पर सवाल- 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान और बाद में ईवीएम को ‘ब्लैक बॉक्स’ बताकर चुनावी पारदर्शिता पर अकारण संदेह खड़ा किया गया, जिसे अदालत खारिज कर चुकी है। 2019 में राफेल मामले में गलत बयानबाजी कर ‘चौकीदार चोर है’ का झूठा दावा करने पर अदालत द्वारा अवमानना नोटिस जारी होने के बाद राहुल गांधी को बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। कैम्ब्रिज और अमेरिकी दौरों में भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाकर देश की छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई। सर्जिकल स्ट्राइक पर ‘खून की दलाली’ का बयान, बालाकोट एयर स्ट्राइक के सबूत मांगना और तवांग झड़प पर दिए गए बयानों से सेना के मनोबल को चोट पहुंचाई गई। सांसद पाण्डे ने कहा कि जब भी विपक्ष चुनावी समर में हारता है, कभी ईवीएम, कभी सुप्रीम कोर्ट तो कभी चुनाव आयोग पर झूठे आरोप मढऩे लगता है। आयोग के सर्वसम्मत रुख के बाद अब कांग्रेस नेतृत्व को देश और संवैधानिक संस्थाओं से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।



