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कोरोना एपीएल-बीपीएल नहीं देखता मुख्यमंत्री जी, मत बांटिए पीडि़त मानव समाज को-रविन्द्र सिंह

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राजनांदगांव(दावा)। 18 वर्ष से ऊपर के आयु वर्ग के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने टीकाकरण अभियान में भेदभाव की जिस नीति को क्रियान्वित करने जा रही है, वह छत्तीसगढ़ के साथ-साथ मानव समाज के लिए भी दुर्भाग्यजनक है। राज्य सरकार की यह नीति सरकार की अकर्मण्यता को छिपाने का प्रयास मात्र है। टीकाकरण में राज्य सरकार की भेदभाव की नीति की आलोचना करते हुए जिला भाजपा के प्रवक्ता रविन्द्र सिंह ने कहा कि भूपेश सरकार कोरोना काल मे भी केवल राजनीति कर रही है, वह भी निम्न स्तर की राजनीति, प्रदेश की जनता को संबोंधित करते हुए राज्य के मुखिया सामान्यत: अपनी योजनाओं अथवा सरकार के विजन के सम्बंध में ही जानकारी देते है किंतु भूपेश बघेल ने सारी राजनीतिक मर्यादाओं एवं राजनीतिक शुचिताओं को दरकिनार करते हुए, पूर्ववर्ती सरकार की 15 साल में स्वास्थ्य के क्षेत्र में किये गए कार्यों की ही आलोचना करने का ही काम किये, जबकि इस 15 साल में ही छत्तीसगढ़ में एम्स जैसी संस्थान और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई जिसका लाभ अभी कोरोना संकट काल मे दिख भी रहा है, किन्तु भूपेश बघेल को तो हर पल राजनीति ही करना है इसलिए शायद वे प्रदेश की जनता को संबोधित कर रहे है यह भूल गए थे, उन्हें आसाम की चुनावी रैली ही याद आ रही थी लगता है।
प्रवक्ता रविन्द्र सिंह ने कहा कि पूरा देश कोरोना से ग्रसित है। कोरोना अमीरी गरीबी, जाति सम्प्रदाय और धर्म के भेदभाव से दूर रहकर हर किसी को मौत के द्वार पर पहुंचा रहा है। हर वर्ग मौत से जूझ रहा है, किंतु छत्तीसगढ़ की सरकार ने इस अवसर पर भी राजनीति करने में भी कोई कसर नही छोड़ रही है और देश के किसी भी राज्य ने जो नही किया वह करके दिखाने का निर्णय ले लिया है कि टीकाकरण में भी एपीएल और बीपीएल का भेद कर दिया जो मानव समाज के लिए बेहद खतरनाक है। सही मायने में छत्तसीगढ़ सरकार ने एपीएल समाज के नौजवानों को मौत के द्वार पर खडे रहने को मजबूर कर दिया है। शायद भूपेश बघेल की सरकार ने एपीएल वर्ग के परिवार को अपने नौजवानों को खोने के लिए तैयार रहने का अप्रत्यक्ष संदेश दे दिया है और नौजवानों के एक समूह को मौत को अपने पास आते देखने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया है जो देश के किसी राज्य में किसी भी सरकार के द्वारा नही किया गया है।
श्री सिंह ने कहा कि भूपेश बघेल की सरकार हर स्तर पर फेल रही है पहले उन्होंने टीकाकरण के सम्बंध में भ्रामक प्रचार कर संदेह का वातावरण तैयार किया और लाखों टीके को खराब होने दिया, जिससे छत्तीसगढ़ आज देश मे सबसे अधिक कोरोना की मौत वाला राज्य बन गया है। अब टीकाकरण में भेदभाव की नीति अपनाकर पूरे टीकाकरण अभियान को बर्बाद करने जा रही है। आपदा काल में छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय मानवता के विरुद्ध एवं व्यक्तियों में ही जहर घोलने का कार्य करने वाला है। बिना किसी संकोच के इस निर्णय को वापस ले कर टीकाकरण को सबके लिए सुलभ कराना चाहिए, क्योंकि मौत जाति वर्ग का भेदभाव नहीं करती है।

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