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रेवाडीह में 211 अवैध प्लाटिंग के विकास शुल्क जमा कराने 74 भू-स्वामियों को नोटिस

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प्रति एकड़ 27 लाख 94 हजार रूपये करना होगा जमा
राजनांदगांव(दावा)।
नगर निगम सीमा क्षेत्र में स्थित अवैध प्लाटिंग को वैध करने एवं विकास शुल्क जमा कराने आयुक्त डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी द्वारा भू-स्वामियों (कालोनाईजरो) को नोटिस जारी किया जा रहा है। इसी कड़ी में रेवाडीह में 211 अवैध प्लाटिंग करने एवं विकास शुल्क जमा नहीं करने पर 74 भू-स्वामियों को 15 दिवस के अंदर विकास शुल्क जमा करने नोटिस जारी किया है।

आयुक्त डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि निगम सीमाक्षेत्र में अवैध प्लाटिंग कर विक्रय करने की शिकायत प्राप्त हो रही है, जिस पर कार्यवाही करने निगम की टीम द्वारा सर्वे किया गया एवं उन्हें नोटिस जारी की गयी। इसी कड़ी में रेवाडीह में 211 अवैध प्लाटिंग करने पर विकास शुल्क जमा कराने 74 भूस्वामियों को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि उपरोक्त भूस्वामी द्वारा भूमि को टुकडों में विक्रय किया गया। सर्वे उपरांत खसरा कलेक्टर के आदेश क्रमांक 2282 दिनांक 31 अगस्त 2019 एवं आदेश क्रं. 212 दिनांक 05 अक्टूबर 2019 के अनुसार अवैध प्लाटिंग का भाग पाया गया एवं वहां किसी भी प्रकार की मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गयी है और न ही वैधानिक कोलोनी नियम 2013 के तहत नगर निगम में पंजीयन कराया गया है। इस संबंध में संबंधितों को कार्यालय द्वारा पूर्व में नोटिस भी जारी किया गया था तथा अवैध कालोनी नियमितिकरण के तहत (नियमितिकरण नियम 15 (क) (1) (15) के तहत) दिनांक 3 अपै्रल 2021 को अंतिम आदेश जारी किया गया था, किन्तु आज तक कोई पहल नहीं की गयी। उन्होंने बताया कि उपरोक्त भूस्वामियों को खसरे में मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने प्रति एकड़ राशि 27 लाख 94 हजार रूपये की दर से नियमितीकरण हेतु अंतिम आदेश पारित किया गया है एवं कहा गया है कि 15 दिवस की अवधि में राशि जमा नहीं होने पर निगम अधिनियम 1956 की धारा 292 (ग) के तहत वैधानिक कार्यवाही की जावेगी। इसी प्रकार कौरिनभाठा, लखोली, मोहारा, नंदई व चिखली पर किये गये अवैध प्लाटिंग के लिये भी भूस्वामियों को नोटिस जारी किया जा रहा है।

ज्ञात हो कि नगर निगम द्वारा अवैध प्लाटिंग मामले में पूर्व में 2-3 लोगों को वसूली हेतु तहसीलदार, राजनांदगांव के माध्यम से आरआरसी जारी की थी किन्तु आज पर्यन्त न वसूली हुई और न ही कार्यवाही। नगर निगम को चाहिये कि वे तहसीलदार को नियुक्त कर कड़ाई से समयसीमा में वसूली कर अवैध प्लाटों को नियमितिकरण कर विकास कार्य आगे बढ़ाना चाहिये। इससे निगम की आय भी बढ़ेगी।

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