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महादेव ऐप का किंगपिन सौरभ चंद्राकर भारत लाया गया, ओमान से प्रत्यर्पण के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस और अफसरों पर टकटकी…

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रायपुर/नई दिल्ली/ देश के सबसे बड़े और चर्चित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क यानी ‘महादेव बुक’ के मुख्य मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यर्पित कर लाया गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस और रॉयल ओमान पुलिस के सहयोग से यह बड़ी कार्रवाई की है। ओमान से मस्कट के रास्ते उसे विशेष टीम द्वारा दिल्ली लाया गया है, और अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जा रहा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर फर्जी दस्तावेजों और पासपोर्ट के सहारे विदेश में रहकर इस सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहा था। भारत सरकार, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के संयुक्त प्रयासों के बाद ओमान में उसकी लोकेशन ट्रेस हुई और रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था।

रविवार को जब सीबीआई की टीम उसे लेकर दिल्ली के् मुख्यालय पहुंची, तो मीडिया के कैमरों के सामने उसके चेहरे पर कोई शिकन या पछतावा नहीं दिखा, बल्कि उसने फिल्म ‘पुष्पा’ के अंदाज में “झुकेगा नहीं…” का पोज भी दिया। सीबीआई के दो मामलों में वह पहले से वांछित है और उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग और हजारों करोड़ के अवैध साम्राज्य को लेकर शिकंजा कसे हुए है।
छत्तीसगढ़ पुलिस और प्रशासनिक महकमे में क्यों मची है हलचल?

सौरभ चंद्राकर के भारत की धरती पर कदम रखते ही छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और पुलिस महकमे में भारी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मास्टरमाइंड के पकड़े जाने के बाद उन वर्दीधारी और रसूखदार लोगों के नाम बेनकाब होंगे, जिन्होंने परोक्ष या अपरोक्ष रूप से इस अवैध साम्राज्य को संरक्षण दिया था?
‘प्रोटेक्शन मनी’ और पुलिस कनेक्शन की होगी जांच: सीबीआई और ईडी की शुरुआती चार्जशीट और दस्तावेजों में यह आरोप पहले ही लग चुका है कि महादेव ऐप के अवैध नेटवर्क से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा ‘प्रोटेक्शन मनी’ (सुरक्षा राशि) के रूप में कई लोक सेवकों, भ्रष्ट अधिकारियों और राजनीतिक आकाओं तक पहुंचाया जाता था।
पिछले कुछ वर्षों के दौरान छत्तीसगढ़ में जब यह सट्टा ऐप अपने चरम पर था, तब कई जिलों के पुलिस अधिकारियों, स्थानीय थानों और खुफिया विंग की भूमिका संदेह के घेरे में आई थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि जब रायपुर कोर्ट में रिमांड के दौरान सौरभ चंद्राकर से पूछताछ होगी, तो वह उन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के नाम उगलेगा जिन्होंने हर महीने मोटी रकम लेकर इस अवैध कारोबार पर आंखें मूंद रखी थीं।

जानकारों का मानना है कि पूछताछ में हवाला के जरिए पैसों के लेन-देन और राजनीतिक-प्रशासनिक गठजोड़ के कई राज खुलेंगे। इसके बाद आने वाले दिनों में कुछ संदिग्ध पुलिस अफसरों और कर्मचारियों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है, जिससे महकमे में बड़े पैमाने पर गाज गिर सकती है।
सौरभ चंद्राकर के रायपुर पहुंचने के बाद अदालत में उसका रिमांड मांगा जाएगा। केंद्रीय एजेंसियां अब उसके जरिए इस बात की परतें टटोलने का प्रयास करेंगी कि देश के भीतर सट्टे के इस खेल को कौन-कौन से स्थानीय चेहरे हवा दे रहे थे। इस गिरफ्तारी से छत्तीसगढ़ के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है और आने वाले हफ्तों में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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