18 हजार के जंग लगे रिक्शों को 43,500 रुपये में पंचायतों में सप्लाई करने का आरोप, 48 रिक्शों के नाम पर निकाले गए 20 लाख 88 हजार
तृतीय श्रेणी की प्रभारी सीईओ द्वारा संविदा कर्मियों से भौतिक सत्यापन कराने और GeM पोर्टल के फर्जी OTP खेल पर उठे गंभीर सवाल
जिला पंचायत सीईओ को 11 बिंदुओं में सौंपी गई शिकायत; 50+ अतिरिक्त ई-रिक्शा के नए भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग
छुईखदान। जिले के पंचायत राज इतिहास में बड़े प्रशासनिक और वित्तीय घोटालों में से एक सनसनीखेज मामला छुईखदान जनपद पंचायत से सामने आया है। यहां ग्राम पंचायतों में स्वच्छता अभियान के नाम पर खरीदे गए 48 गार्बेज रिक्शों (ट्राई साइकिल) की आपूर्ति में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खुलासे से समूचे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। मामले को लेकर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को 11 बिंदुओं में एक विस्तृत शिकायत सौंपी गई है, जिसमें खरीद से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को सवालों के कटघरे में खड़ा किया गया है।
दो फर्मों से सप्लाई, प्रभावशाली लोगों से साठगांठ का आरोप
शिकायत के अनुसार, यह पूरी खरीदी दो फर्मों—श्रीराम फर्नीचर्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स (छुईखदान) और स्वाति कॉरपोरेशन (धमतरी) के जरिए दर्शायी गई है। सूत्रों का आरोप है कि इन फर्मों के तार जिला पंचायत के कुछ प्रभावशाली लोगों से जुड़े हुए हैं। आरोप लगाया गया है कि खुले बाजार में लगभग 18,000 रुपये मूल्य की जंग लगी कबाड़नुमा ट्राई साइकिलों को 43,500 रुपये प्रति नग की दर से नया बताकर ग्राम पंचायतों में खपा दिया गया। इस प्रकार कुल 48 रिक्शों के एवज में 20 लाख 88 हजार रुपये के शासकीय बिल पास करा लिए गए। मुख्य आरोप है कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर तय तकनीकी मानकों, बॉडी, चेसिस और भार वहन क्षमता के विपरीत घटिया सामग्री की सप्लाई की गई है।
तृतीय श्रेणी प्रभारी सीईओ और संविदा कर्मियों की जांच टीम पर सवाल
प्रकरण का सबसे चौंकाने वाला पहलू जनपद पंचायत की प्रभारी सीईओ श्रीमती केश्वरी देवांगन द्वारा जारी पत्र क्रमांक 1421 (दिनांक 12.05.2026) को लेकर है। शिकायत में उल्लेख है कि प्रभारी सीईओ स्वयं मूल पद से अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी को संविदा कर्मियों का सत्यापन दल गठित करने और उसके आधार पर लाखों रुपये के शासकीय आहरण की अनुशंसा करने का विधिक अधिकार है? इस दल में किसी भी तकनीकी विशेषज्ञ या सक्षम राजपत्रित अधिकारी को शामिल नहीं किया गया। पंचायत विभाग के निर्देशों के विपरीत संविदा तकनीकी सहायकों से ‘सब ओके’ की रिपोर्ट तैयार करवा ली गई।
कपड़ा दुकान में बैठकर GeM पोर्टल का OTP लेने का खेल, साइबर फॉरेंसिक जांच की मांग
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप साइबर धोखाधड़ी और प्रक्रियागत धांधली का लगाया गया है। आरोप है कि खरीदी व भुगतान के दौरान सरपंचों और सचिवों के GeM पोर्टल के लॉगिन ओटीपी (OTP) खैरागढ़ की एक कपड़ा दुकान में बैठकर “मैडम ने मंगाया है” कहकर लिए गए और सप्लायरों तक पहुंचाए गए। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि इस अवधि के कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप और एसएमएस चैट की साइबर फॉरेंसिक जांच कराई जाए। यदि यह साबित होता है, तो यह सीधा-सीधा साइबर फ्रॉड और आपराधिक षड्यंत्र का मामला बनता है, जिसे आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।
अब 50+ नए ई-रिक्शा भुगतान की तैयारी, स्वतंत्र जांच की उठी आवाज
सूत्रों का कहना है कि 48 गार्बेज रिक्शों के बाद अब जनपद में 50 से अधिक अतिरिक्त गार्बेज रिक्शा और ई-रिक्शा खरीदी के भुगतान की फाइल तैयार की जा रही है। इसके लिए निचले स्तर के कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन से इस नए भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
साथ ही मांग की गई है कि मामले की जांच जनपद स्तर के अधिकारियों के बजाय जिले के बाहर के किसी स्वतंत्र राजपत्रित अधिकारी से कराई जाए, GeM पोर्टल के आईपी लॉग व दस्तावेज सीज किए जाएं, सभी रिक्शों की पंचायतवार तकनीकी जांच हो और दोषी पाए जाने पर संबंधित फर्मों से रिकवरी करते हुए पंचायत राज अधिनियम व आईटी एक्ट के तहत ईओडब्ल्यू (EOW) और पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।



