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इलाज में लापरवाही का आरोप : कैंसर से जूझ रही डोंगरगढ़ की बेटी, न्याय के लिए पहुंची कलेक्टर-एसपी के द्वार…

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श्री रामकृपा अस्पताल पर गंभीर आरोप, महिला बोली- ‘डॉक्टरों की अनदेखी से कैंसर सेकंड स्टेज पर पहुंचा, अब छोटे बच्चों का क्या होगा’

राजनांदगांव (दावा)। धर्मनगरी डोंगरगढ़ की एक पीडि़त महिला आज अपनी टूटती उम्मीदों और दर्द की फाइल लेकर राजनांदगांव कलेक्टर और एसपी कार्यालय पहुंची। आंखों में आंसू और हाथों में इलाज के दस्तावेज लिए महिला ने श्रीराम कृपा अस्पताल पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि सही समय पर जांच और जानकारी न मिलने के कारण वह आज कैंसर की दूसरी स्टेज पर पहुंच गई है और जिंदगी-मौत के बीच जूझ रही है।

क्या है पूरा मामला?
पीडि़ता के अनुसार अगस्त 2024 में उसे सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। आरोप है कि अस्पताल में इसे सामान्य बताकर केवल दवाइयां दी गईं। न तो पर्याप्त जांच कराई गई और न ही बीमारी की गंभीरता बताई गई। दर्द बढऩे पर ऑपरेशन की सलाह दी गई, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि उसे यह तक नहीं पता कि उसका ऑपरेशन किस डॉक्टर ने किया। इलाज के बाद भी राहत नहीं मिली और हालत बिगड़ती गई। बाद में बाहर जांच कराने पर खुलासा हुआ कि उसे सेकंड स्टेज का कैंसर है।

पीडि़ता की गुहार : मुझे सिर्फ सच और न्याय चाहिए
कलेक्टर कार्यालय में अपनी आपबीती सुनाते हुए पीड़िता भावुक हो गई। उसने कहा कि मैं बार-बार दर्द बताती रही, लेकिन मेरी बात को हल्के में लिया गया। आज मुझे कैंसर से लडऩा पड़ रहा है। मेरे बच्चे अभी छोटे हैं। अगर शुरुआत में सही जांच हो जाती तो शायद आज यह नौबत नहीं आती।

आश्वासन : जांच के बाद होगी कड़ी कार्रवाई
पीडि़ता से मुलाकात के बाद कलेक्टर जितेंद्र यादव ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना। उन्होंने पीडि़ता को आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। पीडि़ता ने पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा से भी मुलाकात की। सीएसपी ने कहा कि यदि पीडि़ता के साथ गलत हुआ है, तो उसे न्याय जरूर मिलेगा। कलेक्टर कार्यालय से निर्देश प्राप्त होते ही पुलिस मामले में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई करेगी।

जवाबदेही पर सवाल
यह मामला केवल एक महिला के इलाज का नहीं, बल्कि चिकित्सा जगत की जवाबदेही और मरीजों के अधिकारों का है। पीडि़ता पहले ही मानवाधिकार आयोग और स्वास्थ्य विभाग को लिखित शिकायत सौंप चुकी है। अब प्रशासन की जांच यह तय करेगी कि यह चूक थी या आपराधिक लापरवाही।

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