स्वदेशी मेले का भव्य समापन : साव बोले- 2014 के बाद बदला भारत, अब आयातक नहीं निर्यातक बना देश
राजनांदगांव (दावा)। भारतीय विपणन विकास केंद्र द्वारा स्टेट हाई स्कूल मैदान में आयोजित प्रादेशिक स्वदेशी मेले का बुधवार को गरिमामयी समापन हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने संबोधन में स्वदेशी को केवल वस्तुओं तक सीमित न रखकर इसे एक वैचारिक क्रांति बताया। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही स्वावलंबी रहा है, जिसने दुनिया को वेद, विज्ञान और चिकित्सा की शिक्षा दी, लेकिन औपनिवेशिक काल में हमारी विचारधारा को कुंठित करने का प्रयास किया गया।
पश्चिम की वैचारिक दासता से मुक्ति जरूरी
डिप्टी सीएम साव ने कहा कि हम 1947 में राजनीतिक रूप से स्वतंत्र तो हो गए, लेकिन वैचारिक रूप से आज भी पश्चिम के प्रभाव में हैं। स्वदेशी आंदोलन का मुख्य ध्येय इसी वैचारिक परतंत्रता से मुक्ति पाना है। उन्होंने जोर दिया कि जिस उत्पाद में देश के नागरिक का पसीना और पैसा लगा हो, उसे अपनाकर ही हम भारत को समग्र स्वाभिमानी बना सकते हैं। संबोधन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि 2014 के बाद देश के आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान में घुसकर की गई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए कहा कि यह सब वैचारिक मजबूती के कारण संभव हुआ। श्री साव ने कहा कि कभी हम सैनिकों के जूते तक बाहर से मंगाते थे, आज हम दुनिया को निर्यात करने वाले देश बन चुके हैं।
स्वच्छता और प्रतिभाओं का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान स्वदेशी मेले में स्वच्छता अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए स्वच्छता प्रभारी हकीम खान का विशेष सम्मान किया गया। साथ ही महिला समिति द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। वसुधैव कुटुंबकम का भाव हमारी शक्ति उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी मूल विचारधारा पूरी दुनिया को परिवार मानने की है। संस्कारधानी राजनांदगांव की जनता ने इस मेले को ऐतिहासिक बनाकर यह सिद्ध कर दिया है कि वे स्वदेशी के प्रति सजग हैं। समारोह में पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा, केदार गुप्ता, पूर्व महापौर मधुसूदन यादव, जिला भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत, उद्योगपति बहादुर अली, संयोजक विनोद डढढा और योगेश बागड़ी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन विजय मानिकपुरी ने किया।



