नगर निवेश की उक्त कारगुजारी पर उठी उंगलियां
अधिवक्ता दमयंती मंडल मामले को लेकर जाएगी हाईकोर्ट
राजनांदगांव। शहर के मोहारा रोड में मल्टीप्लेक्स थियेटर निर्माण के लिए नगर निवेश द्वारा भवन अनुज्ञा प्रदान किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले को देख रही रायपुर की अधिवक्ता दमयंती मंडल ने थियेटर निर्माण में गंभीर गड़बड़ी की शिकायत करते हुए एक ओर नगर निवेश प्रशासन को आड़े हाथों लिया है वहीं उक्त मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने का भी फैसला कर ली है।
बता दें कि अधिवक्ता दमयंती मंडल द्वारा उक्त मल्टी फ्लैट्स थियेटर के आने-जाने के मार्ग में गड़बड़ी किए जाने को लेकर एक बार और प्रेस वार्ता ले चुकी है। अधिवक्ता दमयंती मंडल ने इस बार और उक्त मल्टीप्लेक्स थियेटर के संबंध में एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर बताई कि मोहारा मार्ग में मल्टीप्लेक्स थियेटर का जो निर्माण किया गया है, उक्त थियेटर तक आने-जाने वाला पहुंच मार्ग नहीं होने के बावजूद नगर निवेश द्वारा भवन अनुज्ञा प्रदान कर दी गई है। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव विकास योजना पुनर्विलोकन वर्ष 2031 में स्पष्ट रुप से उल्लेखित है कि मल्टीप्लेक्स में पार्किंग के लिए तल घर अनिवार्य है, लेकिन इस बारे में नियमों को नजरअंदाज कर दिया गया है। जिसके संबंध में उन्होंने बीते 4 फरवरी को दोबारा जांच के लिए कलेक्टर को आवेदन किया था। दोबारा जांच में भी त्रुटि पाई गई। उन्होंने इस पर स्पष्ट किया कि एसडीएम की गत 17 फरवरी की संबंधित जांच रिपोर्ट में भी गलती पाई गई है। शासकीय भूमि पर सडक़ की प्रस्तावित चौड़ाई को 30 मीटर को 45 मीटर बताते हुए विकास अनुज्ञा जारी की गई जिससे शासन की करोड़ों की भूमि अवैध रुप से मोहारा मार्ग पर मल्टीप्लेक्स निर्माण के स्वामी को उपयोग के लिए मिल गई है।
नगर निवेश अधिनियम का घोर उल्लंघन
आवेदिका दमयंती मंडल ने बताया कि सामने की और न्यूनतम 12.0 मीटर एम.ओ.एस. का प्रावधान अनिवार्य है। जबकि 6.96 मीटर मात्र का प्रावधान मान्य राजनांदगांव विकास योजना (पुर्नविलोकन) 2031 मल्टी प्लैक्स हेतु विकास नियम में स्पष्ट तौर पर निदिष्ट कर दिया गया है। जो कि छ.ग. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के प्रावधानों का घोर उल्लंघन है।
प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि वाणिज्य प्रयोजन (मल्टीपलैक्स) हेतु स्पष्ट तौर पर अंकित है कि बेसमेन्ट में पार्किंग अनिवार्य है। राजनांदगांव विकास योजना (पुर्नविलोकन) 2031 के पृष्ठ क्रमांक 96 मल्टीप्लैक्स हेतु विकास नियम में मल्टी प्लैक्स प्रस्तावित भूमि को पहुंच मार्ग उपलव्ध नहीं था। नगर तथा ग्राम निवेश राजनांदगांव के अधिकारी द्वारा विकास योजना के 30.3 मीटर चौड़े मार्ग में शासकीय भूमि को भी सम्मिलित किया तथा 30.0 मीटर चौड़े मार्ग 45.0 मीटर मार्ग बताते हुए विकास अनुज्ञा जारी किया गया है जिससे शासन की करोड़ों रूपये की शासकीय भूमि अवैधानिक तरीके से मल्टी फ्लैक्स के स्वामित्व उपयोग हेतु प्राप्त हो गयी। साथ ही मल्टीप्लेक्स की पहुंच मार्ग उपलब्ध नहीं होने के बावजूद भी अनुज्ञा प्रदान कर दी गयी।
जालसाजी की पराकाष्ठा निरुपित
विकास अनुज्ञा में के.पी.एम.जी. साफ्टवेयर को भ्रमित करने के लिए अनुज्ञा पत्र में मार्ग की चौड़ाई 30 मीटर दर्शायी गयी है। तथा अनुमोदित मानचित्र में 45 मीटर दर्शायी गयी है। जो कि जालसाजी की पराकाष्ठा है एवं गंभीर जांच का विषय है।
उपसंचालक नगर तथा ग्राम निवेश के विकास अनुज्ञा के शर्त क्रमांक 4 में राजनादगांव, बालोद राजमार्ग की चौड़ाई 45 मीटर उल्लेखित है। जबकि राजस्व निरीक्षक से प्राप्त प्रतिवेदन अनुसार वर्तमान में मौके पर शासकीय भूमि घास मद एवं सडक़ सहित कुल चौड़ाई 35.50 मीटर है। उक्त जानकारी आवेदिका को पुन: संशोधित जांच प्रतिवेदन की प्रति अनुविभागीय अधिकारी, राजनांदगांव (छ.ग.) द्वारा प्राप्त हुई। आवेदिका द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र न दिये जान के लिए 23 फरवरी को कलेक्टर को संशोधन जांच प्रतिवेदन जाचं संलग्न कर आवेदन अनापत्ति आवेदन दिया गया, परन्तु आवेदन देने के पश्चात् ही उक्त मल्टी फ्लैक्स को लाईसेंस जारी कर दिया गया। जिसके विरूद्ध अधिवक्ता दमयंती मंडल ने उच्च न्यायालय के समक्ष जाने का फैसला कर लिया है। मोहारा मार्ग क्षेत्र में निर्मित हो रहे उक्त मल्टी प्लैक्स थियेटर को अवैध ढंग से भूमि अनुज्ञा दिए जाने के संबंध में मामला हाई कोर्ट में जाने के बाद क्या गुल खिलता है यह तो बाद की बात है फिलहाल तो यह मामला नगर निवेश प्रशासन की कारगुजारी की ओर उंगलियां ताने हुए हैं।



