महापौर एवं पूर्व सांसद ने विपक्ष को घेरा, कहा- कांग्रेस और अन्य दलों का महिला विरोधी चरित्र हुआ उजागर
राजनांदगांव (दावा)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर राजनैतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राजनांदगांव के महापौर और पूर्व सांसद मधुसूदन यादव ने इस विधेयक को भारतीय संसदीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय करार देते हुए विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने दावा किया कि जो दल इस बिल के विरोध में तर्क दे रहे हैं, वे दरअसल महिला सशक्तिकरण के नहीं, बल्कि महिलाओं को मिलने वाले अधिकारों के विरोधी हैं।
विपक्ष की नीयत पर उठाए सवाल
श्री यादव ने कहा कि 70 वर्षों तक देश पर शासन करने वालों ने कभी महिलाओं के आरक्षण के लिए वास्तविक पहल नहीं की। आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति से यह बिल सदन में आया है, तो विपक्षी नेता तमाम तरह के आरोप लगाकर इसे रोकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष द्वारा परिसीमन और ओबीसी कोटे के नाम पर बिल को अटकाना निंदनीय है। सपा और राजद जैसे दलों का रवैया महिलाओं को वास्तविक राजनैतिक भागीदारी से वंचित रखने वाली मानसिकता को दर्शाता है। यदि यह बिल शत-प्रतिशत समर्थन से पारित नहीं होता, तो विरोध करने वाले सांसदों का महिला विरोधी चरित्र देश के सामने होगा।
प्रधानमंत्री की सद्भावना की प्रशंसा
पूर्व सांसद ने सदन में प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान की सराहना की, जिसमें उन्होंने विपक्ष से कहा था कि वे भले ही श्रेय लेने के लिए अपनी फोटो के साथ विज्ञापन छपवा लें, लेकिन बिल को पारित करने में सहयोग करें। यादव ने कहा कि यह प्रधानमंत्री की महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और निस्वार्थ सोच का प्रमाण है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयानों का समर्थन करते हुए इसे लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक बताया।
अधिकारों के लिए जागरूक बनें महिलाएं
मधुसूदन यादव ने प्रदेश और जिले की महिलाओं से आह्वान किया कि वे उन चेहरों को पहचानें जो केवल वोट बैंक की राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में महिलाएं शिक्षा, राजनीति और आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। यह विधेयक उनके आत्मविश्वास में क्रांतिकारी वृद्धि करेगा। जो नेता आज विरोध में खड़े हैं, वे महिलाओं को उनके संवैधानिक हक से दूर रखना चाहते हैं।



