Home छत्तीसगढ़ डीएमएफ निधि का 70 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल पर होगा...

डीएमएफ निधि का 70 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल पर होगा खर्च : कलेक्टर जितेन्द्र यादव…

27
0

े० सांसद संतोष पाण्डेय की मौजूदगी में डीएमएफ शासी परिषद की बैठक संपन्न
० खनन प्रभावित 15 किमी के दायरे में प्राथमिकता से होंगे विकास कार्य, पांच वर्षीय कार्ययोजना पर हुई चर्चा

राजनांदगांव (दावा)। कलेक्टर जितेन्द्र यादव की अध्यक्षता में आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) शासी परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सांसद संतोष पाण्डेय, खुज्जी विधायक भोलाराम साहू, डोंगरगढ़ विधायक श्रीमती हर्षिता बघेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव, विधायक प्रतिनिधि संतोष अग्रवाल, वनमंडलाधिकारी आयुष जैन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में नवीन प्रावधानों के अनुरूप डीएमएफ के कार्यों की समीक्षा करते हुए आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि जिला खनिज न्यास समिति के माध्यम से जनप्रतिनिधि एवं नामांकित सदस्य मिलकर जिले के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। उन्होंने कहा कि शासन के प्रावधानों के अनुसार शिक्षा, पेयजल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कार्य करना अनिवार्य है तथा खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के साथ विकास कार्य सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि समिति के निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं और आगामी प्रस्तावों को भी सभी की सहमति से क्रियान्वित किया जाएगा। जिससे क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिलेगी।

कलेक्टर ने बताया कि नवीन नियमों के अनुसार डीएमएफ अंतर्गत पंचवर्षीय कार्ययोजना तैयार करना अनिवार्य किया गया है, जिसके तहत आगामी पांच वर्षों के लिए विकास कार्यों की रूपरेखा निर्धारित की जाएगी। साथ ही वार्षिक कार्ययोजना को सेक्टरवार तैयार किया जा रहा है, ताकि आवश्यकता अनुसार कार्यों को चरणबद्ध रूप से स्वीकृति दी जा सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में सीमित राशि उपलब्ध होने के कारण संसाधनों का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। विशेष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनबाड़ी, महिला एवं बाल विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा कौशल विकास जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कार्य किए जाएंगे।

इसके साथ ही अधोसंरचना, सिंचाई एवं अन्य आवश्यक कार्यों को भी नियमानुसार शामिल किया जाएगा। कलेक्टर ने बताया कि खनन से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हितग्राहियों के लिए हितग्राही मूलक योजनाओं को भी डीएमएफ से जोडऩे की दिशा में कार्य किया जा रहा है। खनन क्षेत्र से 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र को प्रत्यक्ष प्रभावित तथा 25 किलोमीटर तक के क्षेत्र को अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। इसी आधार पर जिले के प्रभावित ग्रामों की सूची तैयार कर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत की गई। उन्होंने कहा कि डीएमएफ निधि का 70 प्रतिशत हिस्सा उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं कौशल विकास पर व्यय किया जाएगा तथा शेष राशि अन्य आवश्यक अधोसंरचनात्मक कार्यों पर खर्च की जाएगी। डीएमएफ निधि के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। बैठक में जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं एवं सुझावों से अवगत कराया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here