राजनांदगांव (दावा)। शासकीय मेडिकल कॉलेज, राजनांदगांव के मेडिसिन विभाग में पदस्थ वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रकाश खुंटे पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म और मैदानी अभियानों के जरिए लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और विभिन्न शैक्षणिक व राष्ट्रीय मंचों का प्रभावी उपयोग कर स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को जन-जन तक पहुंचाया है।
कोविड काल में निभाई अहम भूमिका
कोविड-19 महामारी के गंभीर दौर में डॉ. प्रकाश खुंटे ने शासकीय मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्डों में मरीजों के उपचार और प्रबंधन में अग्रिम भूमिका निभाई थी। अस्पताल के भीतर मोर्चा संभालने के साथ-साथ उन्होंने लॉकडाउन के दौरान फेसबुक और यू-ट्यूब जैसे डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया। इसके जरिए उन्होंने वीडियो और ऑनलाइन विमर्श के माध्यम से होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमितों और उनके परिजनों तक सटीक चिकित्सीय सलाह पहुंचाई तथा महामारी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने में बड़ी मदद की।
राष्ट्रीय-राज्य सम्मेलनों में विशेषज्ञ व्याख्यान
डॉ. प्रकाश खुंटे राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मेडिकल कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में लगातार आमंत्रित किए जा रहे हैं। इन प्रतिष्ठित सम्मेलनों में वे आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, नए चिकित्सा अनुसंधानों और जटिल केस स्टडीज पर व्याख्यान देते हैं। वे इन मंचों के माध्यम से प्रदेश के युवा डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के साथ चिकित्सा विज्ञान के व्यावहारिक अनुभवों को साझा कर उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं। हाईपरटेंशन, टाइप-2 डायबिटीज और क्रॉनिक स्ट्रेस (दीर्घकालिक तनाव) जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रबंधन के लिए डॉ. खुंटे दवाओं के साथ-साथ समग्र दृष्टिकोण (होलिस्टिक अप्रोच) अपनाते हैं। वे मरीजों को योग और विशेष रूप से योगनिद्रा के अभ्यास की सलाह देते हैं। इस पद्धति से मरीजों के मानसिक तनाव को कम करने में बड़ी सफलता मिल रही है। जिससे क्रॉनिक बीमारियों से पीड़ित मरीजों के ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायता मिल रही है।
युवाओं को जंक फूड व नशे से दूर रहने की सलाह
विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में डॉ. खुंटे द्वारा लगातार स्वास्थ्य कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। युवा पीढ़ी में बढ़ती जंक फूड की आदत और एंग्जायटी (घबराहट) को देखते हुए वे छात्रों को संतुलित आहार और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक तत्वों के महत्व की जानकारी दे रहे हैं। इसके साथ ही युवाओं को तंबाकू व अन्य नशीले पदार्थों के चंगुल से बचाने के लिए वे नशामुक्ति पर परामर्श और प्रेरक व्याख्यान भी दे रहे हैं।
लाइव सीपीआर डेमो से सिखा रहे जान बचाना
आजकल कम उम्र में बढ़ते कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) के मामलों को देखते हुए डॉ. खुंटे ने अपने जागरूकता अभियानों में लाइव सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) डेमो को विशेष रूप से शामिल किया है। वे मेडिकल डमी के माध्यम से छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हैं कि आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस के आने से पहले शुरुआती कीमती समय (गोल्डन ऑवर्स) में सीपीआर देकर किसी व्यक्ति की जान कैसे बचाई जा सकती है। डॉ. खुंटे के इस बहुआयामी प्रयास की क्षेत्र में सराहना हो रही है।



