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कचरा-गंदगी से पटा जिला अस्पताल के सामने का नाला, बारिश में बेहाल होंगे मरीज और डॉक्टर…

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बड़ी लापरवाही : जीर्णोद्धार का काम बजट में होने के बाद भी शुरू नहीं, अस्पताल परिसर और डॉक्टर कॉलोनी में भरेगा बदबूदार पानी, संक्रमण का खतरा

राजनांदगांव (दावा)। बसंतपुर स्थित जिला चिकित्सालय लाखों रुपए खर्च कर रेनोवेशन कराने के बाद भले ही आज बाहर से बेहद सुंदर नजर आ रहा हो, लेकिन इसके ठीक सामने स्थित बड़ा नाला इसकी सुंदरता पर ग्रहण लगा रहा है। नगर निगम की उदासीनता के कारण इस नाले की समुचित साफ-सफाई नहीं हो पाई है, जिससे यह टनों गाद, प्लास्टिक और कचरे से पटा पड़ा है। बारिश का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन अब तक नाले की सफाई न होने से क्षेत्र में जल-भराव और संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है।

अस्पताल तो ऊंचा हुआ, लेकिन परिसर में फैलेगा गंदा पानी
विगत वर्षों में बारिश के दौरान नाले का गंदा पानी जिला अस्पताल के भीतर और ऑपरेशन थिएटर (ओटी) तक प्रवेश कर जाता था। इस समस्या से अस्थाई राहत पाने के लिए हाल ही में करोड़ों रुपए खर्च कर हॉस्पिटल का रेनोवेशन कराते हुए इसे लगभग दो फीट ऊंचा उठाया गया है। इससे उम्मीद है कि पानी अस्पताल के भीतर न घुसे, लेकिन नाला जाम होने के कारण पूरा अस्पताल परिसर बदबूदार और दूषित पानी से लबालब होना तय माना जा रहा है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

डॉक्टर कॉलोनी की सडक़ें बन जाती हैं तालाब
जिला अस्पताल के ठीक बगल में स्थित डॉक्टर कॉलोनी की सडक़ें हर साल बारिश में नाले के पानी से डूब जाती हैं। स्थानीय डॉक्टरों ने बताया कि गंदा पानी घरों के मुख्य दरवाजे तक आ जाता है। जिससे ड्यूटी के समय अस्पताल जाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है। इस बार भी नाले की सफाई न होने से डॉक्टरों को इसी बजबजाते पानी को कूद-फांद कर पार करते हुए अस्पताल ड्यूटी पर आना पड़ेगा।

नालियों के बीच खड़े बिजली के पोल बने बड़ी बाधा
बदहाली की यह कहानी सिर्फ मुख्य नाले की नहीं है, बल्कि 100 बिस्तर वाले मातृ-शिशु अस्पताल के पास की नालियों का भी यही हाल है। यहाँ नालियों के बीचों-बीच बिजली के पोल (खंभे) खड़े हैं। जिसके कारण न तो उनकी ठीक से सफाई हो पाती है और न ही जल निकासी। कचरा जाम होने से बदबूदार पानी सडक़ों पर बह रहा है, जिससे अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर संक्रमण फैलने का खतरा दोगुना हो गया है।

बजट में शामिल, फिर भी काम बंद
क्षेत्र के जागरूक नागरिक महेंद्र साहू ने बताया कि नगर निगम द्वारा इस क्षेत्र के नार कन्हैया नाला सहित इस बड़े नाले की चौड़ाई और गहराई बढ़ाने के लिए बजट में प्रावधान रखा गया है। इसके बावजूद मानसून शुरू होने तक जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ नहीं किया गया। स्थानीय निवासियों और अस्पताल स्टाफ ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का तत्काल कोई अस्थाई निराकरण किया जाए ताकि बारिश में मरीजों को परेशानी न झेलनी पड़े और संक्रामक रोगों से बचा जा सके।

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