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फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला: निर्माणाधीन नर्सिंग होम की छत ढहने का मामला: आरोपी डॉक्टर को 6 माह की कैद और जुर्माना

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राजनांदगाँव (दावा)। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट, राजनांदगाँव ‘‘विजय कुमार साहू द्वारा माह दिसम्बर 2020 में राजनांदगांव शहर के महेश नगर स्थित निर्माणाधीन नर्सिंग होम के छत की ढलाई के दौरान छत ढह जाने से मलबे में दबकर एक महिला की हुई मृत्यु एवं तीन अन्य श्रमिकों को आयी चोंट, अभियुक्त डॉ. अमोलक जैन पिता स्व. मोतीलाल सिंगधी, उम्र 51 वर्ष, निवासी चौखडय़िा पारा, वार्ड नंबर 37. थाना बसंतपुर, जिला राजनांदगांव (छ.ग.) के लापरवाही, उपेक्षा एवं उत्तावलेपूर्वक कार्य के परिणामस्वरूप होने का दोषी मानते हुये अपराध साबित पाये जाने पर अभियुक्त डॉ. अमोलक जैन को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304 ए के अपराध के लिये 06 (छ:) माह का साधारण कारीीवास एवं एक हजार रूपये का अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास एवं धारा 337 (तीन बार) भारतीय दण्ड संहिता के अपराध के लिये पांच-पांच सौ रूपये का अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में क्रमश: 15-15 दिन के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा से दण्डित किये जाने का दण्डादेश पारित किया गया है। प्रकरण की अभियुक्ता डॉ. विजयाश्री जैन के विरूद्ध अपराध साबित नहीं पाये जाने पर उन्हें दोषमुक्त किया गया है।

मामले में छ.ग. शासन की ओर से पैरवी करने वाले फास्ट ट्रेक कोर्ट के अतिरिक्त लोक अभियोजक, फास्ट ट्रैक कोर्ट अरूण कुमार गुप्ता ने बताया कि, दिनाँक 15 दिसम्बर 2020 को आरोपी डॉ. अमोलक जैन एवं उनकी पत्नि अभियुक्ता डॉ. विजयाश्री जैन के द्वारा अपने महेश नगर स्थित निर्माणधीन नर्सिंग होम के छत की ढलाई कराई जा रही थी जिसमें ज्योति साहू, कमल सिंह, लोमन सिंह ठाकुर, राजेश ठाकुर, ईश्वरी साहू व अन्य मजदूरों को जय स्तंभ चौंक से लाया गया था। सेट्रिंग प्लेट, बल्ली बांधने का काम अधूरा था जिसके संबंध में आरोपी डॉ. अमोलक जैन को बताया गया कि, यहां ढलाई करवाओगे तो दुर्घटना हो जाएगी, किसी की जान चली जाएगी फिर भी डॉ. अमोलक जैन ने काम जल्दी कराने के लिये जानबुझकर ढलाई का काम शुरू करवा दिया। ढलाई का काम आधा हुआ था तथी सेटिंग, बल्ली व छज्जा नीचे गिर गया जिससे ज्योति साहू की मौके पर मृत्यु हो गई और कमल सिंह, लोमन लाल ठाकुर, राजेश ठाकुर, ईश्वरी साहू कों चोंट आई। आरोपीगण के द्वारा उक्त कार्य के लिये कोई इंजीनियर या तकनीकी विशेषज्ञ नहीं रखा गया था तथा नगर पलिक निगम, राजनांदगांव द्वारा जारी भवन निर्माण अनुज्ञा के आदेश का उल्लंघन किया गया।
मृतिका के पति प्रार्थी योगदास साहू की सूचना पर थाना बसंतपुर द्वारा मामला पंजी बद्ध कर जांच में लिया गया था तथा प्रकरण के संपूर्ण जांच उपरान्त भारतीय दण्ड विधान की धारा 288, 337, 304, 188, 84 के तहत् अभियोग पत्र विचारण हेतु न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था। संपूर्ण विचारण उपरान्त प्रकरण में आये साक्ष्य व दस्तावेज के आलोक में माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी गण को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304 एवं धारा 337 (तीन बार) के आरोपों से दोष मुक्त किया गयां है। लेकिन डॉ. अमोलक जैन के विरूद्ध धारा 304 ए एवं 337 (तीन बार) का आरोप प्रमाणित पाया गया। माननीय न्यायालय द्वारा पाया गया कि, अभियुक्त डॉ. अमोलक जैन ने अत्यंत लापरवाही एवं उपेक्षापूर्वक कार्य कर एक व्यक्ति की मृत्यु एवं तीन व्यक्तियों को उपहति कारित किया है। आरोपी के उपेक्षा एवं उतावलेपूर्वक कार्य से एक महिला श्रमिक ज्योति साहू की मृत्यु कारित हुई है। परिणामस्वरूप माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी डॉ. अमोलक जैन को उपरोक्तानुसार दण्डित किया गया है।

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