दानदाताओं एवं प्रशासन की संयुक्त समिति गठित करने की उठी मांग; अद्यतन स्थिति और आय-व्यय का ब्योरा सार्वजनिक करने की अपील
राजनांदगांव (दावा)। शहर में पूर्व कलेक्टर संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में प्रारंभ की गई ‘त्रिनेत्र’ सीसीटीवी परियोजना शहर की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की एक दूरदर्शी एवं महत्वाकांक्षी पहल थी। यह योजना ‘जनता के सहयोग से जनता के लिए और जनता की सहभागिता से संचालित होने की भावना के साथ प्रारंभ की गई थी। जिसमें शहर के अनेक नागरिकों, व्यापारियों, संस्थाओं एवं समाजसेवियों ने स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग प्रदान किया था। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि अब समय आ गया है कि इस महत्वपूर्ण जनहितकारी परियोजना को एक स्थायी, पारदर्शी एवं संस्थागत स्वरूप प्रदान किया जाए। जिससे इसका संचालन अधिक प्रभावी एवं दीर्घकालीन हो सके।
दानदाताओं की बैठक बुलाने की मांग
इसी उद्देश्य को लेकर जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि ‘त्रिनेत्र’ परियोजना में सहयोग देने वाले सभी दानदाताओं की एक सामान्य बैठक शीघ्र आयोजित की जाए। इस बैठक में परियोजना की वर्तमान स्थिति एवं आय-व्यय का ब्यौरा साझा हो। स्थापित सीसीटीवी कैमरों की अद्यतन स्थिति और कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली की जानकारी दी जाए। भविष्य की विस्तार कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए।
पंजीकृत समिति/सोसायटी के गठन का सुझाव
परियोजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक विधिवत पंजीकृत समिति/सोसायटी का गठन करने का सुझाव दिया गया है। इस प्रस्तावित समिति के स्वरूप हेतु प्रमुख बिंदु रखे गए हैं। प्रशासनिक प्रतिनिधित्व: जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जाए। दानदाताओं की सहभागिता: परियोजना में सहयोग देने वाले सभी दानदाताओं को समिति का सदस्य बनाया जाए। पारदर्शी कार्यकारिणी: सदस्यों में से ही लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से कार्यकारिणी व पदाधिकारियों का चुनाव किया जाए। उत्तरदायित्व एवं दायित्व: समिति को परियोजना के संचालन, रख-रखाव, विस्तार और वित्तीय पारदर्शिता का जिम्मा सौंपा जाए। नियमित समीक्षा:समय-समय पर बैठकें आयोजित कर सभी सदस्यों को प्रगति और वित्तीय स्थिति से अवगत कराया जाए।
जनभागीदारी से बढ़ेगा विश्वास
नागरिकों का मानना है कि जिन लोगों ने इस सुरक्षा अभियान में अपना आर्थिक योगदान दिया है। उन्हें केवल दानदाता न मानकर सहभागी सदस्य के रूप में जोडऩे से उत्तरदायित्व की भावना विकसित होगी। संयुक्त भागीदारी से न केवल यह परियोजना अधिक प्रभावी बनेगी, बल्कि भविष्य में भी शहर के विकास और जनहित से जुड़ी अन्य योजनाओं में नागरिकों का विश्वास और सहयोग और अधिक सुदृढ़ होगा। शहरवासियों ने जिला प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की है कि ‘त्रिनेत्र’ परियोजना को एक आदर्श जनभागीदारी मॉडल के रूप में विकसित करते हुए जल्द से जल्द बैठक आयोजित की जाए और संयुक्त समिति के गठन पर सकारात्मक कदम उठाए जाएं।



