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साल 2016 के चर्चित घनश्याम विश्वकर्मा गोलीकांड में 9 साल बाद फैसला: मुंकू नेपाली, गोलू मारवाड़ी और भरत साहू को उम्रकैद…

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तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती ज्योति अग्रवाल की अदालत ने सुनाया फैसला, जानलेवा हमले व षड्यंत्र के दोषियों पर जुर्माना भी लगाया, एक आरोपी सबूतों के अभाव में दोषमुक्त

राजनांदगांव (दावा)। शहर में करीब 9 वर्ष पूर्व हुए सनसनीखेज गोलीकांड में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन मुख्य आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती ज्योति अग्रवाल की अदालत ने घनश्याम विश्वकर्मा पर जानलेवा हमला करने का दोष सिद्ध पाए जाने पर नितिन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली, दिनेश माहेश्वरी उर्फ गोलू मारवाड़ी और भरत साहू को उम्रकैद और अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं मामले के एक अन्य सह-आरोपी विनोद यादव को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
यह था पूरा मामला

राज्य शासन की ओर से पैरवी करने वाले जिला लोक अभियोजक राजेश खांडेकर एवं अतिरिक्त लोक अभियोजक विनोद कुमार बाजपेयी ने बताया कि घटना 21 नवंबर 2016 की है। आहत घनश्याम विश्वकर्मा दोपहर करीब सवा चार बजे अपने साथी दीपक राजपूत के साथ कोर्ट में पेशी निपटाकर मोटर साइकिल से लौट रहा था। तभी इंदिरा नगर चौक के पास आरोपी नितिन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली अपने साथी गोलू मारवाड़ी और भरत साहू के साथ वहां पहुंचा।
तीनों ने एक राय होकर हत्या की नीयत से योजना बनाई और मुंकू नेपाली ने देशी कट्टे से घनश्याम विश्वकर्मा पर फायर झोंक दिया। गोली घनश्याम के दाहिने कंधे के पीछे लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। आनन-फानन में उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घटना की रिपोर्ट आहत के भाई संतोष विश्वकर्मा ने थाना बसंतपुर में दर्ज कराई थी।
भिलाई में ली थी पनाह, पुलिस ने दबोचा था
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मुंकू नेपाली और गोलू मारवाड़ी फरार होकर भिलाई (कैम्प-1, शास्त्री नगर) स्थित विनोद यादव के घर छिप गए थे। बसंतपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और घटना में प्रयुक्त देशी कट्टा व वाहन जब्त कर धारा 307, 120-बी, 212, 34 भादवि तथा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत चालान न्यायालय में पेश किया था। दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहों के बयान सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों को निम्न धाराओं में नितिन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली (40 वर्ष), निवासी गौरीनगर: धारा 307/34 व धारा 120-बी/34 भादवि में आजीवन सश्रम कारावास और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड। आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)ए में 1 वर्ष सश्रम कारावास व 500 रुपये अर्थदंड तथा धारा 27 में 7 वर्ष सश्रम कारावास व 500 रुपये अर्थदंड सजा सुनाई। वहीं दिनेश माहेश्वरी उर्फ गोलू मारवाड़ी (43 वर्ष), निवासी किलापारा- धारा 307/34 व 120-बी/34 भादंवि के तहत आजीवन सश्रम कारावास और कुल 10 हजार रुपये अर्थदंड सजा सुनाई एवं भरत साहू (53 वर्ष), निवासी बसंतपुर- धारा 307/34 व 120-बी/34 भादवि के तहत आजीवन सश्रम कारावास और कुल 10 हजार रुपये अर्थदंड। अर्थदंड की राशि अदा न करने पर सभी दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं शरण देने के आरोपी विनोद यादव के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर न्यायालय ने उसे बरी कर दिया।

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