पेयजल स्रोत के पास गंदे पानी के जमाव से ग्रामीणों में आक्रोश, निर्माण कार्यों का वीडियो बनाकर पंचायत पर दबाव बनाने की कोशिश
डोंगरगढ़ (दावा)। पेयजल बोर के समीप सोखता गड्ढा निर्माण के चलते पानी प्रदूषित होने को लेकर उपजा विवाद अब गरमाने लगा है। मामले में जनपद पंचायत सीईओ भगवती साहू ने मौके पर दस्तक देकर स्थिति का जायजा लिया और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गंदे पानी के गड्ढे को तत्काल बंद करने के कड़े निर्देश दिए हैं। वहीं प्रशासनिक कार्रवाई के बाद संबंधित व्यक्ति द्वारा पंचायत के निर्माण कार्यों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, गोविंद यादव (पिता दयाराम यादव) द्वारा पंचायत के विभिन्न निर्माण कार्यों से संबंधित दस्तावेजों की मांग करते हुए वीडियो बनाया गया। इस पर पंचायत प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी शासकीय दस्तावेज की जानकारी के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत निर्धारित 10 रुपये का शुल्क जमा कर नियमानुसार जानकारी प्राप्त की जा सकती है। साथ ही पंचायत कार्यालय या शासकीय परिसर में इस तरह अनाधिकृत वीडियो बनाने के लिए विधिवत अनुमति लेना आवश्यक है।
पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि का खुलासा करते हुए ग्रामीणों ने बताया कि जिस सोखता गड्ढे को लेकर विवाद हो रहा है। उसे दयाराम यादव द्वारा गांव के मुख्य नल-जल बोर के बिल्कुल नजदीक खोदा गया है। 1 अक्टूबर को स्वच्छता दिवस के उपलक्ष्य में जब जनपद पंचायत सीईओ भगवती साहू ने पेयजल व स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण किया, तो उन्होंने पाया कि सोसायटी के पास स्थित सार्वजनिक बोर—जिसका पानी पूरा गांव पीता है—के अत्यंत निकट गंदे व दूषित पानी का जमाव किया जा रहा है। सीईओ ने जमीनी हकीकत को देखते हुए तत्काल प्रभाव से उस गड्ढे को बंद कराने का आदेश जारी किया। ग्रामीणों का कहना है कि इसी कार्रवाई से बौखलाकर अनर्गल वीडियो वायरल कर पंचायत पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि नल के पानी से दुर्गंध आ रही है। पंचायत ने संदेह के आधार पर पाइपलाइन में लीकेज की तलाश भी कराई, लेकिन कहीं कोई लीकेज नहीं मिला। तकनीकी जांच के दौरान इंजीनियर ने भी पुष्टि की कि सार्वजनिक बोर के अत्यधिक समीप स्थित सोखते के गंदे व सड़ते पानी के रिसाव (सीपेज) के कारण ही भूमिगत जल दूषित हो रहा है और लोगों को बदबूदार पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा था। पंचायत सूत्रों ने बताया कि दयाराम यादव द्वारा जब मकान निर्माण किया जा रहा था, तब भी पंचायत ने उन्हें अतिरिक्त शासकीय भूमि खाली करने और पेयजल स्रोत के समीप बने सैप्टिक टैंक/गड्ढे को बंद करने की हिदायत दी थी। उस समय उन्होंने सहमति जताई थी, लेकिन बाद में उसके स्थान पर एक और नया गड्ढा खोद दिया गया। यही नहीं, उक्त मकान निर्माण के लिए पंचायत द्वारा कोई वैध भवन अनुज्ञा प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी शिशु मंदिर मुसरा स्थित सार्वजनिक बोर के पास इसी तरह का गड्ढा खोदकर पानी दूषित किया जा रहा था, जिसे तत्कालीन तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर तत्काल बंद कराया था। प्रशासन अब इस मामले में भी जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सख्त कदम उठा रहा है।



