राजनांदगांव : प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार होता के मार्गदर्शन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमीता जायसवाल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव प्रीति नागवंशी तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निलेश जगदल्ला ने रविवार को जिला जेल राजनांदगांव का त्रैमासिक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जेल में निरुद्ध बंदियों के बैरकों की साफ-सफाई, स्वच्छता और भोजन व्यवस्था की गुणवत्ता को बारीकी से देखा। साथ ही कैदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और मूलभूत आवश्यकताओं की जानकारी ली।

लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण के निर्देश निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने लंबे समय से जेल में बंद कैदियों के मामलों की सुनवाई में गति लाने के लिए आवश्यक और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। इस संबंध में जिला जेल अधीक्षक को भी ऐसे प्रकरणों को चिह्नित कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया।
पात्र बंदियों को मिलेगी कानूनी मदद जेल लीगल क्लीनिक में कार्यरत पैरा-लीगल वालंटियर मोहिनी साहू को जमानती अपराधों में निरुद्ध ऐसे बंदियों को, जो जमानत पाने की स्थिति में हैं, प्रक्रिया में आवश्यक विधिक सहायता एवं सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए गए। इस संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवश्यक पत्र भेजने के लिए निर्देशित किया गया है।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पात्र बंदियों को समय पर विधिक सहायता व जमानत संबंधी सहयोग मिले, जिससे जेल में अनावश्यक रूप से निरुद्ध बंदियों की संख्या कम की जा सके। साथ ही पुराने एवं लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण में जेल प्रशासन को कैदियों के मूलभूत अधिकारों व आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता बनाए रखने की हिदायत भी दी गई।



