नवरात्र और पर्वकाल माह में लागू करना धार्मिकता पर सरकारी चोट
राजनांदगांव (दावा)। छ ग प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री शाहिद भाई ने यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने के निर्णय पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि जिस यूपीआई को सरकार ने देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया, उसी को अब शुल्क वसूली का जरिया बना लिया है जो छोटे , बड़े व्यापारियों, दुकानदारों और आम उपभोक्ताओं साथ अन्याय है।
शाहिद भाई ने बताया कि यूपीआई ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है। ये व्यवस्था आज करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुका है। जिस प्रकार से केंद्र सरकार यह गुमराह कर रही है कि रूष्ठक्र केवल कुछ पर ही लागू होगा और रु. 2,000 तक के लेन-देन इससे बाहर रहेंगे जो पूरी तरह से गुमराह पूर्ण कृत्य है इस व्यवस्था से बैंकों को 20 हजार करोड़ को होने वाली वित्तीय घाटा को पूरा करने की बात की जा रही है वहीं बैंकों को पिछले वित्तीय वर्ष में 4 लाख करोड़ के लाभ की बात छुपाई जा रही है साथ ही साथ 15 अक्टूबर नवरात्र कि पंचमी से लागू की जाने वाली यह योजना मोदी सरकार की संस्कृति व धार्मिकता पर सरकारी चोट रूपी निर्णय है क्योंकि सरकार ने ही सावन में दूध, दही पर जीएसटी लागू की थी अब जब भारत में अक्टूबर से जनवरी माह को पर्वकाल कहा जाता है इन्हीं माह में नवरात्र, दशहरा, दीपावली, छठ पर्व आता है। गरीब परिवार भी कम से कम 5 हजार की खरीदारी करता है, यहां तक पूरे साल की खरीददारी और इन माह की खरीददारी कई गुना अधिक होती है इसलिए कांग्रेस केंद्र सरकार से पूछ रही है कि जब सरकार यूपीआई को देश की डिजिटल क्रांति की सफलता का उदाहरण का श्रेय ले रही है, तो अब इसके आर्थिक संचालन का बोझ व्यापारियों पर और पीछे दरवाजे से जनता पर डालना क्या उचित है।
अंत में शाहिद भाई ने कहा कि देश के करोड़ों छोटे, बड़े दुकानदार व्यापारियों और आम उपभोक्ता पहले ही केंद्र सरकार के अदूरदर्शिता के चलते महंगाई, बेरोजगारी, जीएसटी, नोटबंदी और बढ़ती लागत से परेशान हैं। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान व्यवस्था में भी शुल्क का रास्ता खोलना सरकार की जनविरोधी आर्थिक सोच को दर्शाता है।उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि यूपीआई पर शुल्क लगाने की दिशा में उठाए गए कदमों पर पुनर्विचार किया जाए और यूपीआई को आम जनता के लिए सरल, सुरक्षित और वास्तविक अर्थों में नि:शुल्क डिजिटल भुगतान जीरो एमडीआर व्यवस्था बनाए रखें।



