0 एक ही ज्ञापन पर दोहरा रवैया: राजनांदगांव विस में काम स्वीकृत, डोंगरगढ़ सीमा आते ही नाली निर्माण ठंडे बस्ते में
0 तिलई, पदुमतरा, खपरीखुर्द और चवेली के ग्रामीणों में भारी आक्रोश, मांग पूरी न होने पर चक्काजाम व उग्र आंदोलन की चेतावनी
राजनांदगांव (दावा)। चिखली से खैरागढ़ मुख्य मार्ग पर जारी सडक़ निर्माण कार्य में प्रशासनिक अनदेखी और राजनीतिक भेदभाव का गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि एक ही मांग और एक ही संयुक्त ज्ञापन के बावजूद राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बोरी में तो सडक़ किनारे नाली का निर्माण करा दिया गया, लेकिन जैसे ही सडक़ डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र की सीमा में प्रवेश करती है। वहां के गांवों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इस पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर डोंगरगढ़ विधानसभा के ग्राम तिलई, पदुमतरा, खपरीखुर्द और चवेली के ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
कलेक्टर को सौंपा गया था संयुक्त मांग पत्र
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 24 दिसंबर 2025 को जनपद पंचायत राजनांदगांव (क्षेत्र क्र. 08) की सदस्य श्रीमती ललिता मोहन साहू के नेतृत्व में क्षेत्र के प्रमुख त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर जिलाधीश राजनांदगांव को लिखित ज्ञापन सौंपा था। इस मांग पत्र में चिखली-खैरागढ़ मार्ग निर्माण के एस्टीमेट में संशोधन कर घनी आबादी वाले गांवों के भीतर जल निकासी हेतु नाली निर्माण स्वीकृत करने का आग्रह किया गया था। इस संयुक्त ज्ञापन में जनपद सदस्य श्रीमती ललिता मोहन साहू, जनपद के पूर्व सभापति ओमप्रकाश साहू, तिलई सरपंच यशोदा साहू, पदुमतरा सरपंच हिना साहू, पूर्व सरपंच मोहन साहू, खपरीखुर्द सरपंच सहित बोरी सरपंच जीवन साहू एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर व मुहर शामिल थे। ज्ञापन की प्रतिलिपि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीक्षण अभियंता, मुख्य अभियंता (दुर्ग) और प्रमुख अभियंता (नया रायपुर) को भी प्रेषित की गई थी।
डोंगरगढ़ सीमा में प्रवेश करते ही बदल गए नियम ?
ग्रामीणों का कहना है कि संयुक्त प्रयास के बाद लोक निर्माण विभाग ने राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बोरी में तो नाली का निर्माण शुरू करा दिया, लेकिन डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र के तिलई, पदुमतरा, खपरीखुर्द और चवेली पहुंचते ही नाली निर्माण के प्रस्ताव को दरकिनार कर दिया गया। जनप्रतिनिधियों ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि जब समस्या समान थी और ज्ञापन भी एक साथ दिया गया था, तो फिर डोंगरगढ़ विधानसभा के गांवों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? क्या इन गांवों के निवासियों को सडक़ किनारे जलभराव, गंदगी और कीचड़ की समस्या से निजात पाने का अधिकार नहीं है?
मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रशासन के इस दोहरे मापदंड से आक्रोशित डोंगरगढ़ क्षेत्र के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि ग्राम बोरी की तर्ज पर तिलई, पदुमतरा, खपरीखुर्द और चवेली में भी एस्टीमेट संशोधित कर तत्काल नाली निर्माण का कार्य शुरू नहीं कराया गया, तो वे राजनांदगांव-खैरागढ़ मार्ग पर चक्काजाम और उग्र जनांदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन से उत्पन्न किसी भी प्रकार की स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की होगी।




