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अघोषित बिजली कटौती से राजनांदगांव के उद्योगों पर गहराया संकट, 1 लाख परिवारों की आजीविका पर असर इंडस्ट्रियल एसोसिएट्स ने विद्युत वितरण कंपनी को सौंपा ज्ञापन; 50 लाख मुर्गियों की जान खतरे में, करोड़ों के नुकसान की आशंका…

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राजनांदगांव (दावा)। जिले में लगातार हो रही अघोषित व लंबी लोड शेडिंग और बार-बार बिजली गुल होने से औद्योगिक इकाइयों की कमर टूट गई है। स्थिति से त्रस्त ‘इंडस्ट्रियल एसोसिएट्स, राजनांदगांव’ ने विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक डॉ. रमन सिंह एवं छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (ष्टस्क्कष्ठष्टरु) के चेयरमैन और मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर निर्बाध बिजली आपूर्ति बहाल करने की गुहार लगाई है। उद्योगपतियों का कहना है कि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो कई उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे।

कंटिन्यूअस प्रोसेस इंडस्ट्रीज को भारी नुकसान
ज्ञापन में बताया गया कि जिले के अधिकांश उद्योग 24 घंटे और 365 दिन लगातार चलने वाले (कंटीन्यूअस प्रोसेस) हैं। अचानक बिजली गुल होने से भारी मशीनों, वीएफडी (ङ्कस्नष्ठह्य), मोटर्स और ट्रांसफार्मर के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कच्चा माल, स्टीम, केमिकल और ईंधन बर्बाद हो जाते हैं। अचानक बंद हुई मशीनों को दोबारा शुरू करने और सामान्य स्थिति में लाने में घंटों का समय और भारी खर्च लगता है। इससे उद्योगों को अब तक करोड़ों रुपये की वित्तीय क्षति हो चुकी है।

पोल्ट्री फार्मों में 50 लाख मुर्गियों के जीवन पर संकट
बिजली संकट का असर बीजाभाटा, ढवराभाटा, गोदरी, मचानपार और दीवान झिटिया जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित पोल्ट्री व लाइवस्टॉक फार्मों पर भी पड़ा है। एबीआईएस (्रक्चढ्ढस्) सहित अन्य फार्मों में लगभग 50 लाख मुर्गियां हैं। बिजली न रहने से वेंटिलेशन, तापमान नियंत्रण, फीडिंग और पानी की सप्लाई ठप हो रही है, जिससे बड़े पैमाने पर मुर्गियों के मरने का खतरा मंडरा रहा है।

1 लाख परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी
उद्योगपतियों ने चेताया कि यह केवल उत्पादन का मुद्दा नहीं, बल्कि उद्योगों और कामगारों के अस्तित्व का सवाल है। जिले के उद्योगों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 1 लाख परिवार आश्रित हैं, जिनमें ठेका मजदूर, ट्रांसपोर्टर्स, पैकेजिंग और स्थानीय छोटे व्यापारी शामिल हैं। उत्पादन घटने या कारखाने बंद होने की स्थिति में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और आर्थिक संकट पैदा हो सकता है।

प्रमुख मांगें-
औद्योगिक फीडरों पर लंबी लोड शेडिंग तुरंत बंद कर निर्बाध आपूर्ति बहाल की जाए।
मेंटेनेंस या शटडाउन की स्थिति में उद्योगों को पूर्व सूचना दी जाए, ताकि मशीनों को सुरक्षित तरीके से बंद किया जा सके।
औद्योगिक क्षेत्रों के ट्रांसफार्मर, सब-स्टेशन और फीडर लोड की तकनीकी समीक्षा कर दीर्घकालिक योजना बनाई जाए।
बड़े उद्योगों के लिए आवश्यकतानुसार डेडिकेटेड (समर्पित) फीडर की व्यवस्था की जाए।
इन प्रमुख उद्योगों ने उठाई आवाज-
ज्ञापन सौंपने वालों में डोंगरगांव पेपर मिल्स (विनोद लोहिया), ड्रूल्स पेट फूड, श्रेया टिन एंड प्लास्टिक्स, श्रेया एग्रो इंडस्ट्रीज, हाई-टेक मेटल पाउडर्स, खेतानी बोर्ड्स, कमल सॉल्वेंट, हाई-टेक पैनल्स, हाई-टेक रॉकफाइबर, एम.जी. रबर, श्रद्धा एग्रो सहित जिले के कई प्रमुख उद्योग शामिल हैं।

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