राजनांदगांव (दावा)। कलेक्टर, सांसद और विधानसभा अध्यक्ष ने रेल मंत्री को लिखा पत्र, लेकिन रेलवे के जांच अधिकारी कौन है, इसकी भी जानकारी नहीं। राजनांदगांव के बरगा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण लगभग 26 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। लोकार्पण के कुछ समय बाद ही पहली बारिश में पुल के एप्रोच हिस्से में दरारें पड़ गईं और सडक़ धंस गई। वहीं आलीवारा में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच सडक़ भी बारिश में बह गई।
बरगा-आलीवारा में 26 करोड़ रुपये की लागत से बने रेलवे ओवरब्रिज में पहली ही बारिश के बाद दरारें पडऩे और एप्रोच सडक़ धंसने का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। हैरानी की बात यह है कि घटना के करीब 12 दिन बाद भी रेलवे यह स्पष्ट नहीं कर पा रहा कि जांच शुरू हुई है या नहीं और जांच किस अधिकारी को सौंपी गई है।
करोड़ों का प्रोजेक्ट पहली बारिश में बेनकाब
राजनांदगांव के बरगा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण लगभग 26 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। लोकार्पण के कुछ समय बाद ही पहली बारिश में पुल के एप्रोच हिस्से में दरारें पड़ गईं और सडक़ धंस गई। वहीं आलीवारा में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच सडक़ भी बारिश में बह गई। इन घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विस. अध्यक्ष, सांसद व प्रशासन ने दिखाई गंभीरता
घटना सामने आने के बाद कलेक्टर जितेंद्र यादव ने मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को पत्र भेजकर तकनीकी जांच कराने की मांग की। इसके बाद सांसद संतोष पांडे ने केंद्रीय रेल मंत्री को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की अनुशंसा की।
रेलवे के पास ही नहीं जांच की जानकारी
मामले की पड़ताल के दौरान रेलवे के अधिकारी से जब जांच की स्थिति पूछी गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि जांच किस अधिकारी को सौंपी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच शुरू हुई है या नहीं, इसकी जानकारी भी उनके पास उपलब्ध नहीं है।
गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना की असली परीक्षा बारिश के दौरान होती है। पहली ही बारिश में पुल और एप्रोच सडक़ को नुकसान पहुंचना निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और कार्य निष्पादन पर सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच और पारदर्शिता जरूरी मानी जाती है।
चुप्पी बढ़ा रही संदेह
जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कार्रवाई की मांग किए जाने के बावजूद रेलवे की ओर से जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं किए जाने से लोगों के मन में संदेह बढ़ रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रेलवे कब जांच शुरू होने, जिम्मेदार अधिकारियों और आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी देता है।
बोरतलाव की घटना पर भी रेल्वे की चुप्पी
वहीं डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम बोरतलाब में रेल्वे ठेकेदार की लापरवाही से 15 जुलाई को पानी में डूबने से तीन बच्चों की मृत्यु हुई। ग्रामवासियों ने महापौर के समक्ष इस हादसे के लिए जिम्मेदार लापरवाही को लेकर आक्रोश व्यक्त किया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए महापौर मधुसूदन यादव ने बोरतालाब थाना प्रभारी से मौके पर ही चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि इस पूरे प्रकरण की शीघ्रता और निष्पक्षता से जांच की जाए और लापरवाही बरतने वाले आरोपी रेलवे ठेकेदार के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



