अम्बागढ़ चौकी। भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप वर्मा ने कांग्रेस द्वारा राम मंदिर सुरक्षा और कथित चोरी को लेकर उठाए गए सवालों को ‘‘ढोंग और पाखंड की पराकाष्ठा’’ बताते हुए तीखा हमला बोला है। भाजपा ने इस पलटवार को निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं में रेखांकित किया
1. ‘‘राम मंदिर से इतनी नफरत क्यों? चुनावी गिद्ध की तरह झपटना बंद करे कांग्रेस’’
कांग्रेस का दोहरा चरित्र-जो कांग्रेस कभी अदालत में प्रभु श्री राम के अस्तित्व को नकारती थी, राम मंदिर निर्माण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की फौज खड़ी करती थी और राम लला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार करती थी। आज उसे अचानक राम मंदिर की सुरक्षा की ‘‘चिंता’’ सताने लगी है? यह कोई चिंता नहीं, बल्कि कांग्रेस की ओछी राजनीति है।
काल्पनिक चोरी पर सियासत-बिना किसी पुख्ता सबूत, तथ्य या पुलिस जांच के सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ‘‘चोरी’’ का ढोल पीटना यह साबित करता है कि कांग्रेस के पास कोई वास्तविक मुद्दा नहीं बचा है। वे सिर्फ देश की सबसे बड़ी आस्था के केंद्र को बदनाम करके सुर्खियां बटोरना चाहते हैं।
2. ‘‘सुरक्षा एजेंसियों का अपमान करना कांग्रेस के डीएनए में है’’
अभेद्य सुरक्षा पर सवाल उठाना शर्मनाक-अयोध्या राम मंदिर परिसर की सुरक्षा कोई साधारण व्यवस्था नहीं है, वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता। अत्याधुनिक तकनीक, सीसीटीवी और देश के सबसे जांबाज सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल उठाकर कांग्रेस सीधे हमारी सुरक्षा एजेंसियों की साख और उनकी देशभक्ति पर कीचड़ उछाल रही है।
अफवाह फैलाना और माहौल बिगाडऩा-यदि स्थानीय स्तर पर कोई छोटी-मोटी प्रशासनिक शिकायत आती है, तो कानून मुस्तैदी से अपना काम करता है। लेकिन उसे ‘‘सुरक्षा में बड़ी चूक’’ बताकर देश में सनसनी और अशांति फैलाने की कोशिश करना एक घिनौना राजनीतिक षड्यंत्र है।
कड़ी चेतावनी-भाजपा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपनी यह घटिया और सनातन-विरोधी राजनीति कहीं और चमकाए। देश की जनता विपक्ष की इस हताशा को अ‘छी तरह समझती है और आस्था के इस पावन केंद्र पर राजनीति करने वालों को कभी माफ नहीं करेगी।



