0 उज्जैन महाकाल की तर्ज पर निकलेगी पालकी यात्रा
0 डीजे नहीं बजेगा, स्थानीय कलाकारों को मिलेगी प्राथमिकता, गेड़ी नृत्य रहेगा विशेष आकर्षण
राजनांदगांव। महाकाल सेना भक्त मण्डल द्वारा आगामी सावन माह में निकलने वाली भगवान चंद्रमौलेश्वर महाकाल की पालकी यात्रा को भव्य, अनुशासित एवं आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से शुक्रवार को माहेश्वरी भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में महाकाल भक्त शामिल हुए तथा यात्रा को और अधिक आकर्षक एवं व्यवस्थित बनाने के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक में सावन सोमवार की पालकी यात्रा की संपूर्ण रूपरेखा, यात्रा मार्ग, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सुरक्षा, स्वच्छता, जनसहभागिता एवं धार्मिक मर्यादाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने सर्वसम्मति से यात्रा को शहर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप भव्य स्वरूप देने का संकल्प लिया।
सावन में 12 स्थानों पर निकलेगी महाकाल की पालकी
समिति पदाधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष संस्कारधानी नगरी राजनांदगांव सहित आसपास के क्षेत्रों में भगवान चंद्रमौलेश्वर महाकाल की पालकी यात्राएं निकाली जाएंगी। प्रथम सोमवार 3 अगस्त, द्वितीय सोमवार 10 अगस्त, तृतीय सोमवार 17 अगस्त, चतुर्थ सोमवार 24 अगस्त, पंचम सोमवार 31 अगस्त तथा विशेष पालकी यात्रा 6 अगस्त गुरुवार को निकाली जाएगी। इसके अतिरिक्त डोंगरगांव, खैरागढ़, पार्रीकला, बोदला सहित अन्य स्थानों में भी महाकाल पालकी यात्राओं का आयोजन होगा।
प्रथम पालकी यात्रा 3 अगस्त को दोपहर 1 बजे
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रथम पालकी यात्रा 3 अगस्त 2026, सोमवार को दोपहर 1 बजे नंदई से प्रारंभ होगी। यात्रा इंदिरा नगर चौक, बासपाई पारा, दुर्गा चौक, गांधी चौक, महाकाल चौक, आजाद चौक, गुड़ाखू लाइन एवं गोल बाजार से होते हुए महालक्ष्मी मंदिर, हमाल पारा पहुंचेगी, जहां यात्रा का विश्राम होगा। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं एवं सामाजिक संगठनों द्वारा भगवान महाकाल की आरती, पुष्पवर्षा एवं स्वागत किया जाएगा। पूरे मार्ग में शिवभक्ति, भजन-कीर्तन और धार्मिक उल्लास का वातावरण निर्मित होगा।
डीजे नहीं बजेगा, स्थानीय कलाकार होंगे आकर्षण का केंद्र
महाकाल पालकी यात्रा के प्रमुख पवन डागा ने बताया कि विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करते हुए यात्रा में डीजे शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक गरिमा एवं परंपराओं को ध्यान में रखते हुए स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी गई है। इस वर्ष यात्रा का प्रमुख आकर्षण पारंपरिक गेड़ी नृत्य रहेगा, जो छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अनूठी झलक प्रस्तुत करेगा।
पालकी यात्रा की गरिमा और व्यवस्था पर विशेष जोर
पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि भगवान चंद्रमौलेश्वर महाकाल की पालकी को उठाने वाले पुरुष एवं महिलाओं को सनातन धर्म की परंपराओं के अनुरूप वेशभूषा धारण करनी होगी, जिससे यात्रा की गरिमा एवं धार्मिक मर्यादा बनी रहे। पूर्व महापौर हेमा देशमुख ने सुझाव दिया कि पालकी यात्रा जिन मार्गों से होकर गुजरेगी, वहां पर्याप्त प्रकाश जल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही यात्रा के गुजरने के बाद मार्गों की सफाई के लिए अलग टीम की व्यवस्था की जाए, ताकि स्वच्छता एवं व्यवस्था बनी रहे।
सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का संदेश
आयोजकों ने कहा कि महाकाल पालकी यात्रा धर्म और संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक समरसता, सेवा भावना और जनसहभागिता का भी संदेश देती है। यात्रा में महिलाओं, युवाओं, सामाजिक संगठनों एवं विभिन्न धार्मिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
अनेक भक्तों ने रखे अपने विचार
बैठक में पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा, पूर्व महापौर हेमा देशमुख, निगम नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले, पवन डागा, अवतराम तेजवानी, राजा मखीजा, शिव श्रीवास्तव, अशोक लोहिया, शारदा तिवारी, मंजू बैद, नेहा गुप्ता, मोना गोसाईं, भरत जोबनपुत्रा, संजय तेजवानी, शिव वर्मा, लक्ष्मण लोहिया, राजू डागा, राकेश सहित अनेक महाकाल भक्तों ने अपने विचार व्यक्त किए। बैठक में विष्णु साव, अशोक पांडे, सूरज बुद्धदेव, राकेश यादव, गोलू गुप्ता, संजू बघेल, निगम पार्षदगण सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
उज्जैन की तर्ज पर शिवमय होगा पूरा शहर
महाकाल भक्तों ने कहा कि महाकाल नगरी उज्जैन की तर्ज पर प्रारंभ की गई यह पालकी यात्रा आज संस्कारधानी नगरी की पहचान बन चुकी है। वर्षभर श्रद्धालु सावन माह में निकलने वाली इस यात्रा का इंतजार करते हैं। सावन माह के प्रत्येक सोमवार को निकलने वाली भगवान चंद्रमौलेश्वर महाकाल की पालकी यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भगवान महाकाल के जयघोष, भजन-कीर्तन, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, धार्मिक झांकियों एवं लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच पूरी संस्कारधानी नगरी शिवमय वातावरण में रंग जाएगी। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी श्रद्धालुओं के सहयोग से इस वर्ष की पालकी यात्रा राजनांदगांव के धार्मिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगी।



