० नीट मामले में पीएम मोदी के कड़े फैसलों और सोनम वांगचुक के अनशन समाप्ति के बाद कांग्रेस व इंडी गठबंधन पर साधा निशाना
० कहा- छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने प्रतिबद्ध है मोदी सरकार, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
राजनांदगांव (दावा)। भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत ने नीट मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई घोषणाओं तथा सोनम वांगचुक द्वारा अनशन समाप्त किए जाने के बाद कांग्रेस सहित इंडी गठबंधन पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इन घटनाक्रमों ने विपक्ष के असली राजनीतिक चरित्र और उनके भारत विरोधी एजेंडे की पोल खोलकर रख दी है। भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए त्वरित और अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार द्वारा न केवल त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के निर्देश दिए गए हैं, बल्कि दोषियों को 5 से 10 साल की कड़ी सजा, कठोर जमानत शर्तों और दोषी पाए जाने पर संबंधित कोचिंग संस्थानों को बंद करने जैसे कड़े प्रावधानों वाले कानून का मसौदा तैयार कराया जा रहा है।
सकारात्मक रुख के बाद समाप्त हुआ अनशन
श्री राजपूत ने बताया कि सरकार की त्वरित संवेदनशीलता और पारदर्शी नीयत को देखते हुए केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में सोनम वांगचुक ने भी सरकार के सकारात्मक रुख पर भरोसा जताया और अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह दर्शाता है कि मोदी सरकार देश के छात्रों और युवाओं के हित में चट्टान की तरह खड़ी है। इसके विपरीत, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने और देश में असंतोष भडक़ाने का काम कर रहे थे।
विपक्ष को न्याय से नहीं, राजनीति से मतलब
उन्होंने कहा कि विपक्ष को कभी भी छात्रों के भविष्य या न्याय से कोई लेना-देना नहीं था। उनका एकमात्र उद्देश्य देश में अराजकता फैलाना था। जब सरकार ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए कड़ा कानून बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया, तो इंडी गठबंधन का असली चेहरा बेनकाब हो गया। देश का युवा समझदार है और वह देख सकता है कि कौन उनके भविष्य के लिए काम कर रहा है और कौन उनके नाम पर केवल राजनीति।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर दी प्रतिक्रिया
धर्मेंद्र प्रधान द्वारा दिए गए इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत ने कहा कि अगर घर में किसी की जिद पर कड़वी दवाई देनी पड़े, तो मां को यह कदम उठाना ही पड़ता है। जंतर-मंतर पर किया जा रहा आंदोलन देश हित में नहीं था और इसके दूरगामी दुष्परिणाम हो सकते थे, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए अपना इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि अब युवाओं को सरकार का सहयोग करना चाहिए। यदि इस बड़े फैसले के बाद भी अराजक तत्वों द्वारा आंदोलन को लंबा खींचने का प्रयास किया जाता है, तो इससे देश की छवि खराब होगी। जिसे देश की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।



