राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां पदस्थ एक जूनियर डॉक्टर पिछले चार वर्षों से केवल नाइट ड्यूटी के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं और ड्यूटी समय से पूरी तरह नदारद रहकर अपना निजी अस्पताल संचालित कर रहे हैं। इस गैरजिम्मेदाराना रवैये के कारण पूरा सरकारी अस्पताल इंटर्नी और जूनियर डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है, जिससे मरीजों की जान से सीधा खिलवाड़ हो रहा है।
मुख्य बिंदु
लगातार 4 वर्षों से सिर्फ नाइट ड्यूटी: आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार, सर्जरी विभाग में कार्यरत डॉ. नारायण दास अगस्त 2022 से लेकर अब तक केवल नाइट ड्यूटी ही कर रहे हैं। उनका पूरा ड्यूटी रोस्टर सिर्फ रात की पाली के लिए ही तैयार किया जाता है।
ड्यूटी से नदारद, निजी अस्पताल में समय: हैरानी की बात यह है कि रात के समय डॉ. नारायण दास अपनी शासकीय ड्यूटी से पूरी तरह गायब रहते हैं। इस दौरान उनकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं होता।
बिना अनुमति के निजी प्रैक्टिस: डॉ. नारायण दास ने 15 अक्टूबर 2025 को मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को आवेदन देकर निजी प्रैक्टिस की अनुमति मांगी थी, जिसे प्रबंधन ने अस्वीकार कर दिया था। इसके बावजूद, वे लगातार एक निजी अस्पताल में फुल-टाइम सेवाएं दे रहे हैं।
खुद का निजी अस्पताल होने की आशंका: सूत्रों के मुताबिक, जिस निजी अस्पताल में डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, वह असल में उन्हीं का है, जिसे उन्होंने किसी अन्य डॉक्टर के नाम पर पंजीकृत करवा रखा है।
मरीजों की जान से खिलवाड़ और प्रबंधन की संलिप्तता
सरकारी नियमों को ताक पर रखकर इस तरह लगातार ड्यूटी से गायब रहना और शासन-प्रशासन की आंखों में धूल झोंकना गंभीर सवाल खड़े करता है। इतने लंबे समय से चल रही इस अनियमितता से क्या मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पूरी तरह अनजान है?
जानकारों का कहना है कि बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इतने लंबे समय तक इस तरह की गतिविधियां चलना असंभव है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था और उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार प्रशासन और शासन स्तर पर क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं।



