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प्रशासनिक निर्देश बेअसर: सड़कों पर जमा मवेशियों और अंधेरे के साए में खैरागढ़ की जनता…

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कलेक्टर के कड़े आदेशों के बाद भी धरातल पर कार्रवाई शून्य; सड़कों पर नंदियों का कब्जा, मुख्य मार्गों पर छाई रहती है घोर मुफलिसी

दैनिक दावा | खैरागढ़ ब्यूरो

(रिपोर्टर: यतेन्द्र जीत सिंह ‘छोटू’, ब्यूरो चीफ – जिला खैरागढ़)

खैरागढ़। जिला मुख्यालय खैरागढ़ में लावारिस मवेशियों और हिंसक नंदियों का आतंक चरम पर है। सड़कों पर लगातार हो रहे हादसों के बावजूद शासन-प्रशासन और नगर पालिका मूकदर्शक बने बैठे हैं। जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर कलेक्टर द्वारा समय-समय पर सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थितियाँ जस की तस बनी हुई हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बारिश में बनी विकट स्थिति, सड़कें बनीं मवेशियों का ठिकाना

शहर के मुख्य मार्गों, पिपरिया से लेकर अमलीपारा तक तथा सोने सरकार की प्रमुख सड़कों पर जगह-जगह मवेशियों ने डेरा डाल रखा है। बारिश के मौसम में खुले स्थानों पर पानी व कीचड़ भरने के कारण मवेशी सूखी जगह और मच्छरों से बचने के लिए सीधे सड़कों के बीचों-बीच आकर बैठ जाते हैं। व्यस्तम मार्गों पर अचानक मवेशी सामने आ जाने से वाहन चालकों के लिए हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

बाजार क्षेत्रों में ‘नंदियों की लड़ाई’ से मंडरा रहा जान-माल का खतरा

शहर में नंदियों की बढ़ती संख्या ने नागरिकों और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। गोल बाजार और प्रमुख चौक-चौराहों पर नंदी अक्सर आपस में भिड़ जाते हैं। इनकी हिंसक लड़ाई के कारण राहगीर घायल हो रहे हैं, वहीं सड़क किनारे खड़ी दोपहिया व चारपहिया गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं।

व्यापारियों का कहना है कि बैठकों में अस्थायी सब्जी ठेलों और अव्यवस्थित पार्किंग को हटाने व विस्थापित करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बैठक खत्म होते ही पूरे निर्देश फाइलों में दफन हो जाते हैं।

स्ट्रीट लाइट बंद, जिला कार्यालय के बाहर भी छाया रहता है अंधेरा

मवेशियों की समस्या के साथ-साथ शहर की बदहाल स्ट्रीट लाइट व्यवस्था ने खतरे को दोगुना कर दिया है। मुख्य मार्गों पर लगी लाइटें या तो बंद हैं या उनकी रोशनी बेहद कम है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद जिला कार्यालय के बाहर मुख्य मार्ग पर घोर अंधेरा छाया रहता है। बारिश, फिसलन और अंधेरे के बीच सड़कों पर बैठे मवेशी वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन हादसों की पुनरावृत्ति हो रही है।

जिम्मेदार अधिकारियों ने साधी चुप्पी, फोन तक उठाना नहीं समझा मुनासिब

शहर में बढ़ती अव्यवस्था, बंद स्ट्रीट लाइटों और मवेशियों की समस्या पर जब पक्ष जानने के लिए संबंधित प्रशासनिक व नगर पालिका अधिकारियों से टेलीफोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। लगातार संपर्क के बाद भी कोई जवाब न मिलना अधिकारियों की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली और जवाबदेही से भागने की आदत को उजागर करता है।

कब मिलेगी खैरागढ़वासियों को राहत?

सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा, हिंसक होते नंदी, बाजार का पार्किंग संकट और अंधेरी सड़कें—ये सभी जनसुरक्षा से जुड़े सीधे मुद्दे हैं। केवल कागजी बैठकों और खोखले निर्देशों से राहत मिलने वाली नहीं है। अब देखना यह होगा कि कलेक्टर के निर्देशों को ठेंगा दिखाने वाले जिम्मेदार अधिकारी कब नींद से जागेंगे और खैरागढ़ की जनता को इन विकराल समस्याओं से निजात दिलाएंगे।

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